
चोरबागान के 91 साल पुराने दुर्गा पूजा पंडाल में मची अफरा-तफरी, दो बच्चे भी मृतकों में शामिल; आयोजकों समेत 12 लोग हिरासत में, मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में शनिवार शाम दुर्गा पूजा के दौरान एक दर्दनाक हादसा हो गया। चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ मचने से कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि 25 लोग घायल हो गए। मृतकों में दो बच्चे भी शामिल हैं। हालांकि, अस्पताल से जुड़े सूत्रों ने मृतकों और घायलों की संख्या इससे अधिक होने का दावा किया। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर कई प्रमुख दुर्गा पूजा पंडालों में दर्शनार्थियों का प्रवेश रोक दिया।
बारिश से बचने के लिए पंडाल में घुसे लोग
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शनिवार शाम करीब 7:40 बजे कोलकाता के गिरिश पार्क थाना क्षेत्र स्थित चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल के निकास द्वार के पास भगदड़ मची। महासप्तमी के अवसर पर पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान बारिश शुरू होने से कई लोग बचने के लिए पंडाल के अंदर रुक गए। बाहर मौजूद भीड़ भी अंदर प्रवेश करने की कोशिश करने लगी, जिससे प्रवेश द्वार पर दबाव बढ़ गया।
आयोजन समिति के अनुसार, एक समय में सीमित संख्या में लोगों को प्रवेश देने की व्यवस्था थी, लेकिन अचानक बढ़े भीड़ के दबाव के कारण पंडाल का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद वहां भगदड़ की स्थिति बन गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, लोग एक-दूसरे को धक्का देने लगे और कई लोग जमीन पर गिर गए। भीड़ का दबाव इतना अधिक था कि नीचे गिरे लोगों को उठने का मौका नहीं मिला और कई लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरते चले गए।
अस्पताल में घायलों का इलाज, परिजनों में मचा कोहराम
हादसे के बाद स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। कई लोगों को एंबुलेंस से कोलकाता मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घटनास्थल पर स्ट्रेचर की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण कुछ घायलों को लोग अपने हाथों से उठाकर अस्पताल तक ले गए। अस्पताल में मृतकों के शव रखे गए, जबकि घायलों का उपचार शुरू किया गया।
घटना के बाद अस्पताल परिसर में मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा। लोग अपने परिवार के सदस्यों की तलाश करते नजर आए। हादसे के बाद पंडाल परिसर में जूते-चप्पल, पर्स, बोतलें और अन्य सामान बिखरा पड़ा था। सुरक्षा की दृष्टि से पंडाल की बिजली बंद कर दी गई और लोगों का प्रवेश रोक दिया गया।
निकास मार्ग को लेकर उठे सवाल
प्रत्यक्षदर्शियों ने पंडाल में प्रवेश और बाहर निकलने के रास्तों को लेकर भ्रम की स्थिति होने की बात कही। कुछ लोगों का आरोप है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा कर्मी मौजूद नहीं थे। शुरुआती जानकारी के अनुसार, पंडाल के भीतर बना गोलाकार गलियारा भीड़ के आवागमन का प्रमुख रास्ता था। इसी क्षेत्र में भगदड़ होने की बात सामने आई है।
हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा। पुलिस ने पंडाल के प्रवेश द्वार के क्षतिग्रस्त हिस्से को जांच के लिए सुरक्षित रखा है।
आयोजकों और सुरक्षाकर्मियों समेत 12 लोग हिरासत में
घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दुर्गा पूजा आयोजन समिति के पदाधिकारियों, निजी सुरक्षा गार्डों और ड्यूटी पर तैनात लोगों समेत 12 व्यक्तियों को हिरासत में लिया। पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है, ताकि भीड़ प्रबंधन में हुई संभावित चूक और हादसे के अन्य कारणों का पता लगाया जा सके।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अस्पताल पहुंचकर घायलों के उपचार और राहत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री के अनुसार, हादसे के दौरान सीटी की आवाज सुनकर लोग अचानक दौड़ने लगे, जिससे अफरा-तफरी बढ़ गई। पूजा पंडाल के महासचिव जयंत बनर्जी के इस्तीफा देने की भी जानकारी सामने आई है।
मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये, घायलों को 5 लाख की सहायता
राज्य सरकार ने हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की घोषणा की है। घायलों को पांच-पांच लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। सरकार ने घायलों के इलाज का पूरा खर्च उठाने की भी बात कही है।
प्रधानमंत्री राहत कोष से भी मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की गई है। घटना के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने निर्धारित कार्यक्रम स्थगित कर दिए। उन्होंने अस्पताल जाकर घायलों से मिलने की बात कही। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी हादसे पर दुख जताया और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
91 साल पुराना है चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल
चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल इस वर्ष अपने 91वें आयोजन के कारण चर्चा में था। इस बार पंडाल को ‘बियॉन्ड साउंड’ थीम पर तैयार किया गया था। इसका उद्देश्य रोजमर्रा के शोर से दूर शांति और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करना था। कलाकार सुशांत शिबानी पॉल ने पंडाल की थीम तैयार की थी। इसकी विशेष डिजाइन और अनूठी सजावट के कारण बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंच रहे थे।
अन्य पंडालों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा
हादसे के बाद प्रशासन ने कोलकाता के कई प्रमुख दुर्गा पूजा पंडालों में प्रवेश सीमित करने या अस्थायी रूप से बंद करने के निर्देश दिए। इनमें ताला प्रत्यय, अलीपुर सार्वजनिक, चेतला अग्रणी और बालीगंज सार्वजनिक जैसे पंडाल शामिल हैं। साल्ट लेक क्षेत्र के प्रमुख पूजा आयोजनों को भी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने के लिए कहा गया है।
राज्य सरकार ने पूरे पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा पंडालों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की है। समिति भीड़ प्रबंधन, प्रवेश और निकास मार्गों तथा पंडालों की संरचनात्मक सुरक्षा का आकलन करेगी। हादसे के बाद सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच के आधार पर जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने की बात कही गई है।

