ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास भीषण हादसा, ट्रक ने 45 श्रद्धालुओं को कुचला; 13 की मौत, 32 घायल

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ढलान पर बेकाबू ट्रक ने दुकानों और श्रद्धालुओं को रौंदा, मंदिर की दीवार ढही; नो-एंट्री में भारी वाहन पहुंचने पर उठे सवाल, पुलिस पर भी गंभीर आरोप

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास रविवार तड़के एक दर्दनाक हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि 32 लोग घायल हो गए। घायलों में दो पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। सात घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसे के बाद घटनास्थल से लेकर अस्पताल तक चीख-पुकार मच गई। मृतकों के परिजन अपनों को खोने के गम में बदहवास नजर आए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, हादसा चीनौर रोड पर मंदिर के पास ढलान वाले हिस्से में हुआ। सप्तमी के अवसर पर शीतला माता के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। मंदिर के आसपास प्रसाद और पूजा सामग्री की दुकानें लगी थीं। इसी दौरान भारी सामान से लदा एक ट्रक अनियंत्रित होकर श्रद्धालुओं और दुकानों को रौंदता हुआ मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार की दीवार से टकरा गया।

ट्रक की टक्कर से ढही मंदिर की दीवार, मलबे में दबे लोग

टक्कर इतनी जोरदार थी कि मंदिर के प्रवेश द्वार की दीवार ढह गई। ट्रक की चपेट में आए कई श्रद्धालु दीवार के मलबे और वाहन के नीचे दब गए। हादसे में आसपास की पांच से छह दुकानें भी क्षतिग्रस्त हो गईं। सड़क पर मलबा और दुकानों का सामान बिखर गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ट्रक ढलान से फिसलता हुआ आया और चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। अचानक हुए हादसे के कारण श्रद्धालुओं को संभलने तक का मौका नहीं मिला। स्थानीय लोगों ने पुलिस और प्रशासन के साथ मिलकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। ट्रक के नीचे फंसे लोगों को निकालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।

13 लोगों की मौत, सात घायलों की हालत गंभीर

हादसे में घायल लोगों को ग्वालियर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। 1000 बिस्तर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुधीर सक्सेना ने 13 लोगों की मौत की पुष्टि की। शुरुआती जानकारी में मृतकों की संख्या 11 बताई गई थी, जो बाद में बढ़कर 13 हो गई।

घायलों में महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल हैं। कुछ लोगों को सिर में गंभीर चोटें आई हैं, जबकि कई के हाथ-पैर टूट गए हैं। एक घायल के दोनों पैर टूटने के बाद उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है। हादसे में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी और होमगार्ड जवान भी घायल हुए हैं।

कलेक्टर रुचिका चौहान और पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह यादव अस्पताल पहुंचे और घायलों के उपचार की जानकारी ली। प्रशासन ने घायलों और उनके परिजनों को जरूरत के अनुसार रेडक्रॉस के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराने की बात कही है।

मां का आरोप- बेटे की सांसें चल रही थीं, अस्पताल ले जाने से रोका

हादसे के बाद एक मृतक की मां ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किरण नाम की महिला के अनुसार, उनका 19 वर्षीय बेटा गौरव हादसे में घायल हुआ था और उसकी सांसें चल रही थीं। महिला का आरोप है कि वह बेटे को निजी अस्पताल ले जाना चाहती थीं, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उसे पोस्टमार्टम के लिए ले जाने को कहा।

महिला ने आरोप लगाया कि एंबुलेंस से बेटे को निजी अस्पताल ले जाने की कोशिश करने पर पुलिसकर्मियों ने डंडे मारकर एंबुलेंस को वहां से भगा दिया। उनके मुताबिक, इलाज में देरी होने के कारण बेटे की जान चली गई।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में पुलिस और प्रशासन का पक्ष सामने आने तथा जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

नो-एंट्री में ट्रक कैसे पहुंचा? पुलिस प्रशासन पर उठे सवाल

हादसे के बाद मृतकों के परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों ने सवाल उठाया कि जब श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही रोकी गई थी, तो ट्रक वहां तक कैसे पहुंच गया।

मृतका सरला तोमर के भतीजे लोकेंद्र सिंह तोमर ने भी ट्रक की आवाजाही पर सवाल उठाते हुए पूछा कि सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद भारी वाहन को प्रवेश किसने दिया। घटनास्थल पर पुलिस के स्टॉपर टूटे हुए मिले थे।

पोस्टमार्टम कक्ष के बाहर एकत्र परिजनों ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह के पहुंचने पर नाराजगी जताई और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए। लोगों ने घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कार्रवाई करने की मांग की।

हादसे से कुछ देर पहले मौके पर थे एसएसपी

जानकारी के अनुसार, हादसे से करीब 15 मिनट पहले तक वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह घटनास्थल के आसपास यातायात व्यवस्था संभाल रहे थे। उनके वहां से निकलने के कुछ देर बाद ट्रक श्रद्धालुओं की भीड़ में घुस गया।

पुलिस के अनुसार, श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर भारी वाहनों की आवाजाही रोकी गई थी। इसके बावजूद ट्रक स्टॉपर तोड़ते हुए मंदिर की दीवार से टकरा गया। ट्रक अनियंत्रित कैसे हुआ और प्रतिबंधित मार्ग तक कैसे पहुंचा, इसकी जांच की जा रही है।

मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

हादसे के बाद मंदिर परिसर और अस्पताल में अपनों की तलाश करते परिजन नजर आए। कई परिवारों को शुरुआत में अपने लापता सदस्यों की जानकारी नहीं मिल सकी। एक महिला ने बताया कि दर्शन के बाद परिवार के लोग बाहर निकल आए थे, लेकिन उनका रिश्तेदार दिव्यांश नहीं मिला। काफी तलाश के बाद उसकी पहचान हुई।

इसी तरह, 23 वर्षीय पवन की मौत के बाद परिजन रोते-बिलखते उसका शव लेकर गए। कुछ परिवार अभी भी घायलों की स्थिति और मृतकों की पहचान से जुड़ी जानकारी जुटाने में लगे रहे।

घटना ने मंदिर परिसर की सुरक्षा और यातायात प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल हादसे के कारणों की जांच जारी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ट्रक चालक से नियंत्रण कैसे छूटा और सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद इतना बड़ा हादसा कैसे हुआ।

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