सब्सिडी के लिए सरपंच का निवास प्रमाण पत्र अमान्य, मूल निवासी प्रमाण पत्र ही होगा मान्य: हाई कोर्ट

Spread the love

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि ग्राम पंचायत के सरपंच द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र किसी भी शासकीय सब्सिडी या योजना का लाभ लेने के लिए वैध दस्तावेज नहीं माना जाएगा। अदालत ने कहा कि सरकारी योजनाओं में पात्रता तय करने के लिए केवल सक्षम प्राधिकारी, जैसे तहसीलदार या अधिसूचित अधिकारी द्वारा जारी मूल निवासी प्रमाण पत्र ही मान्य होगा।

न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू की एकलपीठ ने रायपुर निवासी जसपाल सिंह की याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता ने राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत 50 प्रतिशत सब्सिडी के लिए आवेदन किया था, लेकिन आवश्यक दस्तावेजों के अभाव में उसका आवेदन स्वीकृत नहीं हो सका।

राज्य शासन की ओर से अदालत को बताया गया कि योजना का लाभ केवल छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को ही दिया जा सकता है। याचिकाकर्ता ने अपनी पात्रता साबित करने के लिए ग्राम पंचायत के सरपंच द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था, जिसे अदालत ने मान्य दस्तावेज मानने से इनकार कर दिया।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सरकारी योजनाओं में पात्रता का निर्धारण निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाएगा और इसके लिए केवल तहसीलदार या अन्य अधिसूचित सक्षम अधिकारी द्वारा जारी मूल निवासी प्रमाण पत्र ही स्वीकार्य होगा।

अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह संबंधित विभाग के समक्ष अपना वैध मूल निवासी प्रमाण पत्र तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करे, जिसके बाद उसके सब्सिडी दावे पर नियमानुसार विचार किया जाएगा।

फैसले का महत्व

इस निर्णय के बाद स्पष्ट हो गया है कि शासकीय योजनाओं, अनुदान और सब्सिडी का लाभ लेने के लिए सरपंच द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र पर्याप्त नहीं होगा। आवेदकों को निर्धारित सक्षम अधिकारी से जारी मूल निवासी प्रमाण पत्र ही प्रस्तुत करना होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

× How can I help you?