नक्सलमुक्त बस्तर की नई तस्वीर: दुर्गम पहाड़ पार कर तीन गांवों तक पहुंची स्वास्थ्य टीम, 100 से अधिक ग्रामीणों का किया उपचार

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जगदलपुर/सुकमा। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सल प्रभाव कम होने के बाद अब दूरस्थ इलाकों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच मजबूत होती दिखाई दे रही है। सुकमा जिले के बड़े हिड़मा पहाड़ और घने जंगलों के बीच बसे कनइगुड़ा, घुमोड़ी और बड़े हिड़मा जैसे दुर्गम गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची और 100 से अधिक ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार किया।

स्वास्थ्य विभाग की कोंडासावली उप स्वास्थ्य केंद्र की टीम ने कठिन पहाड़ी रास्तों, जंगलों और नालों को पैदल पार कर गांवों तक पहुंच बनाई। चिकित्सा शिविर के दौरान ग्रामीणों की जांच की गई, जिसमें मलेरिया और खुजली के मरीजों की संख्या अधिक पाई गई। मरीजों को आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई गईं और स्वास्थ्य संबंधी सलाह भी दी गई।

इन गांवों तक पहुंचना स्वास्थ्य कर्मियों के लिए आसान नहीं है। पक्की सड़क और परिवहन सुविधाओं के अभाव में एंबुलेंस या अन्य वाहन नहीं पहुंच पाते। स्वास्थ्य कर्मचारियों को कई किलोमीटर पैदल चलकर पहाड़ और जंगल पार करने पड़ते हैं। कोंडासावली से इन गांवों की दूरी लगभग 25 किलोमीटर बताई जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग की टीमें इन इलाकों में मलेरिया, गंभीर कुपोषण, सिकल सेल एनीमिया सहित अन्य बीमारियों की जांच कर रही हैं। साथ ही घर-घर जाकर स्वास्थ्य सर्वेक्षण, टीकाकरण और आवश्यक दवाओं का वितरण भी किया जा रहा है।

जगरगुंडा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक डॉ. विपिन ठाकुर ने बताया कि घर-घर पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण किए जाने से ग्रामीणों को काफी राहत मिल रही है। उन्होंने कहा कि मितानिन, एएनएम और अन्य स्वास्थ्य कर्मी पल्स पोलियो अभियान, टीकाकरण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए कठिन परिस्थितियों में लगातार कार्य कर रहे हैं।

बस्तर संभाग के संयुक्त संचालक (स्वास्थ्य) डॉ. महेश सांडिया ने बताया कि संभाग के सभी सात जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएमएचओ) को निर्देश दिए गए हैं कि वे अंदरूनी और दुर्गम गांवों तक नियमित रूप से स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य कर्मी जोखिम उठाकर ग्रामीणों तक उपचार पहुंचा रहे हैं, जिससे सुदूर क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता लगातार बेहतर हो रही है।

स्वास्थ्य विभाग की इस पहल को नक्सलमुक्त बस्तर में विकास और जनसेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे वर्षों से बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित ग्रामीणों को अब नियमित चिकित्सा सेवाओं का लाभ मिलने लगा है।

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