दुर्ग यूनिवर्सिटी में 11 साल बाद शुरू होगी UTD: जुलाई से 5 विषयों में पीजी की पढ़ाई, रिसर्च और प्रोफेशनल कोर्स को मिलेगा बढ़ावा

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दुर्ग। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय (दुर्ग यूनिवर्सिटी) में स्थापना के करीब 11 साल बाद यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट (UTD) की शुरुआत होने जा रही है। नए शैक्षणिक सत्र से विश्वविद्यालय परिसर में पहली बार स्नातकोत्तर (PG) स्तर की नियमित पढ़ाई शुरू होगी। इसके लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथेमेटिक्स, बॉटनी और जूलॉजी विषयों को मंजूरी मिल चुकी है तथा जुलाई से कक्षाएं शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

विश्वविद्यालय की स्थापना अप्रैल 2015 में हुई थी, लेकिन अब तक इसकी भूमिका मुख्य रूप से परीक्षाएं आयोजित कराने और परिणाम जारी करने तक सीमित थी। अब UTD शुरू होने से विश्वविद्यालय सीधे शिक्षण और शोध गतिविधियों का केंद्र बनेगा।

उच्च शिक्षा और रिसर्च को मिलेगा नया आयाम

कुलपति प्रो. संजय तिवारी ने बताया कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल परीक्षा आयोजित करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा, शोध और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि प्री-पीएचडी परीक्षा शुरू हो चुकी है और आने वाले समय में रिसर्च गतिविधियों को भी विस्तार दिया जाएगा। साथ ही मेरिट सूची में स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल भी प्रदान किया जाएगा।

पांच विषयों में होगी पीजी की पढ़ाई

विश्वविद्यालय ने जिन पांच विषयों का प्रस्ताव भेजा था, उन्हें मंजूरी मिल चुकी है। इनमें फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथेमेटिक्स, बॉटनी और जूलॉजी शामिल हैं। इन सभी विषयों में जुलाई से स्नातकोत्तर कक्षाएं संचालित की जाएंगी। प्रवेश प्रक्रिया के बाद नियमित शिक्षण कार्य शुरू होगा।

AICTE से 8 प्रोफेशनल कोर्स को मंजूरी

विश्वविद्यालय को ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) से आठ नए प्रोफेशनल कोर्स संचालित करने की भी स्वीकृति मिल गई है। इनमें एमबीए, एमसीए और फिनटेक जैसे पाठ्यक्रम शामिल हैं। इसके अलावा राज्य सरकार के विजन डॉक्यूमेंट के अनुरूप सप्लाई चेन मैनेजमेंट, ब्लॉकचेन मैनेजमेंट और ट्रैवल एंड टूरिज्म जैसे रोजगारोन्मुखी कोर्स शुरू करने की तैयारी भी की जा रही है।

स्पेशल बीएड और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की तैयारी

विश्वविद्यालय ने रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया (RCI) से स्पेशल बीएड कार्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव भी अंतिम चरण में पहुंचा दिया है। इसके साथ ही स्पेशल एजुकेशन के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की योजना भी बनाई गई है। राज्य सरकार की मंजूरी मिलने के बाद इस दिशा में कार्य शुरू किया जाएगा।

शिक्षकों की भर्ती का रास्ता भी होगा साफ

करीब आठ वर्ष पहले UTD के लिए प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर सहित कुल 64 पद स्वीकृत किए गए थे, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब UTD शुरू होने के साथ इन पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया फिर से शुरू होने की उम्मीद है, जिससे विश्वविद्यालय में शिक्षकों की कमी दूर हो सकेगी।

नई बिल्डिंग का लोकार्पण अभी बाकी

विश्वविद्यालय की नई इमारत तैयार होने के बावजूद उसका लोकार्पण अब तक नहीं हो सका है। ऐसे में शुरुआती दौर में पढ़ाई और प्रायोगिक कक्षाओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। इस संबंध में शासकीय वीवाईटी साइंस कॉलेज के साथ एमओयू किया गया है। जरूरत पड़ने पर विद्यार्थियों को सहयोगी कॉलेजों की आधुनिक प्रयोगशालाओं का उपयोग कराया जाएगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि UTD की शुरुआत से दुर्ग संभाग के विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा, रिसर्च और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों का लाभ मिलेगा तथा विश्वविद्यालय की शैक्षणिक पहचान और मजबूत होगी।

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