रायपुर |
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में पहली बार माइक्रो ब्रुअरी (Micro Brewery) स्थापित करने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद अब बीयर प्रेमियों को स्थानीय स्तर पर तैयार की गई ताज़ा और विभिन्न फ्लेवर वाली क्राफ्ट बीयर का स्वाद मिल सकेगा। सरकार के इस निर्णय से पर्यटन, होटल एवं रेस्तरां उद्योग के साथ-साथ निवेश और रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। आबकारी विभाग जल्द ही इच्छुक संचालकों को लाइसेंस जारी करेगा।
क्या होती है क्राफ्ट बीयर?
क्राफ्ट बीयर सामान्य औद्योगिक बीयर की तुलना में छोटे बैचों में सीमित मात्रा में तैयार की जाती है। इसमें प्राकृतिक माल्ट, हॉप्स और उच्च गुणवत्ता वाले अन्य अवयवों का उपयोग किया जाता है। इसे आमतौर पर उसी परिसर में तैयार कर ताज़ा परोसा जाता है, जिससे इसका स्वाद और गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है।
माइक्रो ब्रुअरी क्या है?
माइक्रो ब्रुअरी ऐसी इकाई होती है, जहां सीमित मात्रा में बीयर का उत्पादन कर उसे मुख्य रूप से उसी परिसर में स्थित रेस्तरां या ग्राहकों को परोसा जाता है। देश के कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और गोवा जैसे राज्यों में यह मॉडल पहले से लोकप्रिय है। विशेष रूप से बेंगलुरु को भारत की “क्राफ्ट बीयर राजधानी” माना जाता है। अब छत्तीसगढ़ भी इस सूची में शामिल होने जा रहा है।
4 हजार वर्गफीट परिसर अनिवार्य
नई नीति के तहत माइक्रो ब्रुअरी और उससे जुड़े रेस्तरां का संयुक्त क्षेत्रफल कम से कम 4,000 वर्गफीट होना आवश्यक होगा। साथ ही अग्नि सुरक्षा, उपकरणों की सुरक्षा तथा अन्य नियामकीय मानकों का पालन अनिवार्य रहेगा।
10 लाख रुपये सालाना लाइसेंस शुल्क
सरकार द्वारा निर्धारित नई आबकारी नीति के अनुसार माइक्रो ब्रुअरी संचालकों को प्रतिवर्ष 10 लाख रुपये का लाइसेंस शुल्क देना होगा। प्रत्येक इकाई को प्रतिदिन अधिकतम 1,000 लीटर क्राफ्ट बीयर उत्पादन की अनुमति होगी। उत्पादित बीयर पर 60 रुपये प्रति बल्क लीटर उत्पाद शुल्क भी देय होगा।
250 से 300 रुपये तक हो सकती है कीमत
सरकारी अनुमान के अनुसार माइक्रो ब्रुअरी में तैयार की जाने वाली एक गिलास क्राफ्ट बीयर की कीमत लगभग 250 से 300 रुपये के बीच हो सकती है। यह बीयर ताज़ा होने के साथ विभिन्न फ्लेवर में उपलब्ध रहेगी, जिससे ग्राहकों को प्रीमियम अनुभव मिलेगा।
सरकार को मिलेगा राजस्व, पर्यटन को बढ़ावा
राज्य सरकार का मानना है कि माइक्रो ब्रुअरी नीति से आबकारी राजस्व में वृद्धि होगी। साथ ही पर्यटन, आतिथ्य उद्योग, होटल-रेस्तरां व्यवसाय और निजी निवेश को भी नई गति मिलेगी, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को लाभ होने की उम्मीद है।



