जगदलपुर, 9 जून। कभी नक्सलवाद और हिंसा की पहचान रहा बस्तर अब नवाचार और आधुनिक कृषि के क्षेत्र में नई मिसाल पेश कर रहा है। बस्तर के किसान संपत झा ने अपनी चार वर्षों की मेहनत और समर्पण से दुनिया के सबसे महंगे आमों में गिने जाने वाले जापानी मियाजाकी आम की सफल पैदावार कर क्षेत्र को नई पहचान दिलाई है। इस विशेष आम की बाजार में कीमत लगभग ढाई से तीन लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक बताई जाती है।
संपत झा ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व उन्होंने आंध्र प्रदेश के राजमहेंद्रवरम (राजमुंदरी) से भारी कीमत चुकाकर मियाजाकी आम का पौधा मंगवाया था। शुरुआत में इसे केवल एक प्रयोग माना गया, लेकिन लगातार तीन वर्षों तक विशेष देखभाल, तकनीकी प्रबंधन और मेहनत के बाद पौधे में फल आने लगे। अब उनके बगीचे में इस दुर्लभ और प्रीमियम किस्म के आम सफलतापूर्वक तैयार हो रहे हैं।
किसानों के लिए अतिरिक्त आय का बड़ा अवसर
संपत झा का मानना है कि यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि बस्तर के किसानों के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोल सकती है। उन्होंने कहा कि बस्तर की उपजाऊ मिट्टी, अनुकूल जलवायु और पर्याप्त वर्षा मियाजाकी जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती के लिए उपयुक्त हैं। यदि बड़े पैमाने पर इसकी खेती को बढ़ावा दिया जाए तो किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ प्रीमियम फल उत्पादन से भी बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं।
जापान से जुड़ी है मियाजाकी आम की पहचान
मियाजाकी आम की उत्पत्ति जापान के मियाजाकी प्रांत में हुई है, जिसके नाम पर इस फल का नाम रखा गया। यह आम अपने आकर्षक गहरे लाल रंग, असाधारण मिठास और उच्च पोषण मूल्य के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। एक फल का वजन सामान्यतः 350 ग्राम से 900 ग्राम तक होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार मियाजाकी आम में सामान्य आमों की तुलना में अधिक शर्करा पाई जाती है, जिससे इसका स्वाद बेहद मीठा होता है। इसके अलावा इसमें एंटीऑक्सीडेंट, बीटा-कैरोटीन और फोलिक एसिड प्रचुर मात्रा में मौजूद रहते हैं, जो इसे स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बेहद लाभकारी बनाते हैं।
बदलती तस्वीर का प्रतीक बना बस्तर
कभी बारूद और संघर्ष की खबरों के लिए सुर्खियों में रहने वाला बस्तर अब आधुनिक कृषि, नवाचार और बागवानी के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। संपत झा द्वारा मियाजाकी आम की सफल खेती न केवल क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि बस्तर की धरती में उच्च मूल्य वाली कृषि फसलों के उत्पादन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
इस सफलता ने बस्तर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है और कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

