बिलासपुर |
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि आपराधिक न्यायशास्त्र का मूल सिद्धांत यह है कि किसी भी बेगुनाह व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। कोर्ट ने शादी का झांसा देकर दैहिक शोषण के आरोपी को दोषमुक्त किए जाने के निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।
7 साल तक साथ रहने के बाद दर्ज कराई रिपोर्ट
मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता महिला की मुलाकात वर्ष 2013 में रायगढ़ में पढ़ाई के दौरान आरोपी से हुई थी। महिला ने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 में आरोपी ने शादी का प्रस्ताव देकर उसे अपने साथ रखा और विभिन्न स्थानों पर साथ रहकर शारीरिक संबंध बनाए।
महिला का कहना था कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर लंबे समय तक उसका शोषण किया और बाद में उसे छोड़ दिया। इसके बाद 9 नवंबर 2021 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (दुष्कर्म) और 417 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया गया।
निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा
जांच और सुनवाई के बाद निचली अदालत ने यह मानते हुए कि दोनों के बीच संबंध आपसी सहमति पर आधारित थे, आरोपी को दोषमुक्त कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसे अब खारिज कर दिया गया है।
कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा:
- पीड़िता स्वयं स्वीकार करती है कि वह करीब 7 वर्षों तक आरोपी के साथ अपनी मर्जी से रही।
- घटना के समय पीड़िता वयस्क थी और अपने निर्णय लेने में सक्षम थी।
- आरोपी द्वारा अगस्त 2021 में छोड़ने के बाद भी तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई, बल्कि लगभग ढाई महीने बाद शिकायत की गई।
- देरी के संबंध में कोई संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं किया गया।
इन तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने माना कि संबंध सहमति से स्थापित थे और दुष्कर्म का मामला नहीं बनता।
आपराधिक न्यायशास्त्र पर कोर्ट की टिप्पणी
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आपराधिक न्याय प्रणाली का मूल सिद्धांत है कि किसी निर्दोष व्यक्ति को सजा नहीं दी जानी चाहिए। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषमुक्त करना न्यायोचित बताया गया।
दूसरी खबर: पत्नी को मुक्त कराने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका
प्रेम विवाह के बाद पत्नी को जबरन ले जाने का आरोप
बिलासपुर में ही एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका पर सुनवाई करते हुए युवती के परिजनों को नोटिस जारी किया है।
याचिकाकर्ता युवक ने बताया कि उसने 16 फरवरी 2026 को मनेंद्रगढ़ निवासी अनुसूचित जनजाति वर्ग की युवती से रतनपुर स्थित महामाया मंदिर और मनेंद्रगढ़ में हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह किया था। शादी के बाद दोनों को अस्पताल परिसर में स्टाफ क्वार्टर भी मिला था।
परिवार पर जबरन ले जाने का आरोप
युवक के अनुसार, 7 मार्च 2026 को जब उसकी पत्नी क्वार्टर में अकेली थी, तब उसके परिजन और एक प्रभावशाली व्यक्ति उसे उसकी इच्छा के विरुद्ध अपने साथ ले गए। इसके बाद से उसका कोई पता नहीं है और मोबाइल भी बंद है।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन से बार-बार संपर्क के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे उसे आशंका है कि उसकी पत्नी को अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया है।
हाईकोर्ट का निर्देश
हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए:
- युवती के परिजनों को नोटिस जारी किया
- नोटिस तामील कराने की जिम्मेदारी संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक को सौंपी


