रायगढ़ में निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों को एक ही दुकान से किताबें खरीदने के लिए मजबूर करने और संस्था के नाम वाली कॉपियां बेचने के मामले में शिक्षा विभाग ने सख्ती दिखाई है। तीन बड़े स्कूलों को अंतिम चेतावनी देते हुए मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई की बात कही गई है।

रायगढ़ 15 मार्च 2026। जिले में निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों को एक ही दुकान से किताबें और कॉपियां खरीदने के लिए मजबूर करने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में तीन प्रमुख निजी स्कूलों को अंतिम चेतावनी जारी की गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि आदेशों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित स्कूलों की मान्यता तक रद्द की जा सकती है।जानकारी के अनुसार शिक्षा विभाग ने वैदिक इंटरनेशनल स्कूल, ओपी जिंदल स्कूल तमनार और ओपी जिंदल स्कूल रायगढ़ को नोटिस जारी करते हुए अंतिम चेतावनी दी है। इन स्कूलों पर आरोप है कि वे अभिभावकों को एक निश्चित दुकान से ही किताबें खरीदने के लिए दबाव बना रहे हैं और संस्था के नाम से मुद्रित कॉपियां भी बेच रहे हैं।
कलेक्टर ने पहले ही जारी किए थे निर्देश
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने पहले ही सभी निजी स्कूलों के संचालकों की बैठक बुलाई थी। बैठक में रायगढ़ जिला कलेक्टर कार्यालय की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि किसी भी स्कूल को अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताब या कॉपी खरीदने के लिए बाध्य करने की अनुमति नहीं होगी।प्रशासन ने यह भी कहा था कि स्कूलों द्वारा निर्धारित सभी किताबें और कॉपियां जिले की विभिन्न पुस्तक दुकानों में उपलब्ध कराई जाएं, ताकि अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार कहीं से भी उन्हें खरीद सकें।

अभिभावकों की शिकायत के बाद कार्रवाई
बताया जा रहा है कि कई अभिभावकों ने शिकायत की थी कि कुछ बड़े निजी स्कूल बुक सेंटर संचालकों से मिलीभगत कर किताबों और कॉपियों की बिक्री करवा रहे हैं। अभिभावकों को कहा जाता है कि वे केवल उसी निर्धारित दुकान से किताबें खरीदें, अन्यथा बच्चों को कक्षा में दिक्कत होगी।इसके अलावा कुछ स्कूल संस्था के नाम से मुद्रित कॉपियां भी बेच रहे हैं, जिन्हें खरीदना छात्रों के लिए अनिवार्य जैसा बना दिया जाता है। इससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
नियमों का उल्लंघन मान रहा प्रशासन
शिक्षा विभाग का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था पूरी तरह गलत है और शिक्षा विभाग के निर्देशों का उल्लंघन भी है। यदि कोई स्कूल अभिभावकों को एक ही दुकान से किताबें खरीदने के लिए मजबूर करता है तो यह नियमों के खिलाफ है।इसी कारण संबंधित स्कूलों को अंतिम चेतावनी जारी करते हुए कहा गया है कि वे तुरंत इस व्यवस्था को बंद करें और सभी किताबें सामान्य पुस्तक दुकानों पर उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
आदेश नहीं मानने पर होगी सख्त कार्रवाई
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि स्कूल प्रशासन चेतावनी के बाद भी अपने तरीके में सुधार नहीं करता है तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें स्कूल की मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।प्रशासन का कहना है कि शिक्षा को व्यापार बनाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाना जरूरी है। इसलिए निजी स्कूलों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

