छत्तीसगढ़ के इस जिले में बनेगा प्रदेश का सबसे बड़ा सैनिक स्कूल, 500 विद्यार्थियों को मिलेगी सैन्य शिक्षा की राह…….

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक मानचित्र पर धमतरी जिला जल्द ही एक नई पहचान दर्ज कराने जा रहा है। जिले में 500 सीटों की क्षमता वाले एक विशाल सैनिक स्कूल की स्थापना की कवायद तेज हो गई है। राज्य सरकार द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना का प्रस्ताव विधिवत अनुमोदित कर केंद्रीय रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) को प्रेषित कर दिया गया है। यह न केवल धमतरी बल्कि पूरे रायपुर संभाग के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।

युवाओं के लिए सुनहरा अवसर

प्रस्तावित सैनिक स्कूल का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को राष्ट्रीय स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ सैन्य करियर के लिए तैयार करना है। यहाँ पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अनुशासित वातावरण में न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता प्राप्त होगी, बल्कि उनके शारीरिक एवं नेतृत्व कौशल का भी सर्वांगीण विकास हो सकेगा। यह संस्थान विशेष रूप से उन मेधावी छात्रों के लिए वरदान साबित होगा, जो भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होकर देश की सेवा करने का सपना देखते हैं।

अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा परिसर

अधिकारियों के अनुसार, यह सैनिक स्कूल आधुनिक सुविधाओं और विश्वस्तरीय अधोसंरचना (Infrastructure) से सुसज्जित होगा। परिसर में डिजिटल शिक्षण माध्यमों से लैसअत्याधुनिक स्मार्ट कक्षाएं होंगी। शारीरिक फिटनेस और खेलों के लिए विस्तृत मैदान के साथ-साथ सुव्यवस्थित छात्रावास (Hostel) सुविधा तथा समृद्ध पुस्तकालय एवं विशेष रक्षा प्रशिक्षण केंद्र भी स्थापित किया जाएगा।

जिला प्रशासन की प्राथमिकता

धमतरी के कलेक्टर ने इस परियोजना को जिले के विकास के लिए मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन इस प्रोजेक्ट को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। रक्षा मंत्रालय की टीम जल्द ही संभावित स्थलों का निरीक्षण करेगी। हम भूमि चयन से लेकर बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता तक, सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर रहे हैं ताकि इस स्कूल को जल्द से जल्द धरातल पर उतारा जा सके।

क्षेत्रीय विकास को मिलेगी गति

सैनिक स्कूल की स्थापना से शिक्षा के साथ-साथ क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी नई ऊर्जा मिलेगी। इस संस्थान के संचालन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही, यह स्कूल धमतरी को प्रदेश के एक प्रमुख शैक्षणिक केंद्र के रूप में स्थापित करेगा, जिससे छात्रों को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश पाने के लिए एक सुदृढ़ आधार प्राप्त होगा। अब पूरे प्रदेश की निगाहें रक्षा मंत्रालय के आगामी निरीक्षण और स्वीकृति पर टिकी हैं, जिसके बाद निर्माण कार्य का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा।

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