
खैरागढ़, 23 मई 2026। छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक और देशभर में प्रसिद्ध कला एवं संगीत संस्थान Indira Kala Sangeet Vishwavidyalaya का नाम अब आधिकारिक रूप से बदल दिया गया है। राज्य शासन ने विश्वविद्यालय का नया नाम “राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय” किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। शासन की स्वीकृति मिलने के बाद अब विश्वविद्यालय की नई पहचान को औपचारिक रूप से लागू करने का रास्ता साफ हो गया है।
जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन का सुझाव राज्यपाल एवं कुलाधिपति की ओर से दिया गया था। इसके बाद कुलपति Prof. (Dr.) Lovely Sharma के नेतृत्व में विश्वविद्यालय प्रशासन ने आवश्यक दस्तावेज और प्रक्रियाएं पूरी कर शासन को प्रस्ताव भेजा। प्रशासनिक परीक्षण और दस्तावेजी प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने 21 मई 2026 को नाम परिवर्तन की स्वीकृति जारी कर दी।
ऐतिहासिक विरासत को मिलेगा सम्मान
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह फैसला केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि खैरागढ़ राजपरिवार की ऐतिहासिक भूमिका और सांस्कृतिक योगदान को सम्मान देने की दिशा में बड़ा कदम है। लंबे समय से विश्वविद्यालय के नाम में “इंदिरा” शब्द को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी रहती थी, जबकि संस्थान की स्थापना और उसकी विरासत सीधे तौर पर खैरागढ़ राजपरिवार से जुड़ी रही है। नए नाम के जरिए अब उस ऐतिहासिक पहचान को स्पष्ट रूप से सामने लाने की कोशिश की गई है।
कुलपति ने जताया आभार
कुलपति प्रो. (डॉ.) लवली शर्मा ने राज्य शासन और राज्यपाल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर को नई पहचान देगा। उन्होंने बताया कि नाम परिवर्तन की प्रक्रिया के दौरान कई आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे, जिन्हें सीमित समय में जुटाकर शासन को भेजा गया। इस कार्य में सहायक प्राध्यापक Dr. Mangalanand Jha का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
राजपरिवार ने किया फैसले का स्वागत
खैरागढ़ राजपरिवार की ओर से भी इस निर्णय का स्वागत किया गया है। Raja Aryavrat Singh और Rajkumari Shatakshi Singh ने इसे पूर्वजों की विरासत, दानशीलता और शिक्षा के प्रति उनके योगदान को सम्मान देने वाला ऐतिहासिक फैसला बताया है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि खैरागढ़ की सांस्कृतिक पहचान और राजपरिवार की दूरदर्शिता का प्रतीक है। ऐसे में इसकी मूल पहचान और विरासत को संरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है।
कला और संगीत शिक्षा का प्रमुख केंद्र
देश और प्रदेश में कला एवं संगीत शिक्षा के प्रमुख केंद्रों में शामिल यह विश्वविद्यालय वर्षों से संगीत, ललित कला और सांस्कृतिक शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में नाम परिवर्तन को केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि इतिहास, विरासत और सांस्कृतिक अस्मिता से जुड़ा बड़ा कदम माना जा रहा है।

