
“मन की बात कहें, चुप्पी तोड़ें; सुनें, समझें और सहयोग करें। मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य के समान ही महत्वपूर्ण है।”
शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग के मनोवैज्ञानिक मार्गदर्शन एवं परामर्श प्रकोष्ठ द्वारा विद्यार्थियों, प्राध्यापकों एवं आमजन में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता विकसित करने तथा इससे संबंधित विषयों पर खुले एवं सकारात्मक संवाद को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से “बात करो, चुप्पी तोड़ो” विषय पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मानसिक, भावनात्मक एवं व्यक्तिगत समस्याओं के संबंध में संवाद की आवश्यकता को रेखांकित करना तथा लोगों को अपनी समस्याएँ मित्रों, माता-पिता, परिजनों एवं विश्वसनीय व्यक्तियों के साथ साझा करने के लिए प्रेरित करना था। इस अवसर पर विशेष रूप से बताया गया कि मानसिक तनाव, चिंता एवं मनोवैज्ञानिक समस्याओं पर खुलकर चर्चा करना कमजोरी का नहीं, बल्कि समस्याओं को समझने और उनके समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का सकारात्मक प्रयास है। साथ ही, समय पर परामर्श एवं भावनात्मक सहयोग प्राप्त करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय कुमार सिंह ने अपने संबोधन में मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों के लिए संवेदनशील, सुरक्षित एवं सहयोगपूर्ण शैक्षणिक वातावरण विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी व्यक्तिगत एवं भावनात्मक समस्याओं को बिना किसी संकोच के साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जिससे उन्हें समय पर आवश्यक मार्गदर्शन एवं सहयोग उपलब्ध कराया जा सके।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. मनोज कुमार दानी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), दुर्ग ने अपने उद्बोधन में वर्तमान समय में मानसिक तनाव एवं मनोवैज्ञानिक चुनौतियों की बढ़ती प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने, अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने तथा आवश्यकता पड़ने पर उचित सहायता एवं परामर्श प्राप्त करने की महत्ता बताई। उन्होंने विद्यार्थियों को मानसिक समस्याओं को छिपाने अथवा अकेले सहन करने के बजाय विश्वसनीय व्यक्तियों से संवाद स्थापित करने के लिए प्रेरित किया।
मनोवैज्ञानिक मार्गदर्शन एवं परामर्श प्रकोष्ठ की संयोजक डॉ. रचिता श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की पृष्ठभूमि एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता विकसित करने तथा विद्यार्थियों को समय पर मार्गदर्शन एवं परामर्श उपलब्ध कराने में प्रकोष्ठ की भूमिका स्पष्ट की। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी समस्याओं एवं चिंताओं को निःसंकोच साझा करने के लिए प्रेरित किया तथा आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. अभिषेक सुराना ने विद्यार्थियों एवं युवाओं में मानसिक एवं मनोवैज्ञानिक समस्याओं के विभिन्न संभावित कारणों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने ऐसी समस्याओं की समय रहते पहचान करने तथा उनके समाधान के लिए उचित मार्गदर्शन एवं परामर्श प्राप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, भावनात्मक समस्याओं की समय पर पहचान तथा आवश्यकता पड़ने पर उचित सहायता प्राप्त करने के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के समाधान में संवाद एवं पारस्परिक सहयोग की भूमिका को रेखांकित किया।
डॉ. अनुपमा कश्यप ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए आग्रह किया कि वे अपनी व्यक्तिगत, भावनात्मक एवं मानसिक समस्याओं को बिना किसी संकोच के प्राध्यापकों तथा परामर्श प्रकोष्ठ के सदस्यों के साथ साझा करें। उन्होंने आश्वस्त किया कि विद्यार्थियों की समस्याओं को सुनने, समझने तथा आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए वे सदैव उपलब्ध रहेंगी।
डॉ. दिव्या मिंज ने मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक संतुलन के महत्व पर विचार व्यक्त करते हुए सकारात्मक दृष्टिकोण, पारस्परिक संवाद एवं भावनात्मक सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित किया। इसी क्रम में डॉ. एस. डी. देशमुख ने मानसिक तनाव एवं मनोवैज्ञानिक समस्याओं के प्रबंधन के विभिन्न उपायों पर प्रकाश डालते हुए सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास तथा समयानुकूल परामर्श की उपयोगिता बताई। अन्य प्राध्यापकों ने भी अपने विचार साझा करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्यों को सार्थकता प्रदान की।
कार्यक्रम के अंतर्गत मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के संदेश को व्यापक स्तर तक पहुँचाने के उद्देश्य से महाविद्यालय परिसर से नगर दुर्ग तक जागरूकता रैली का आयोजन किया गया, जिसमें 200 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। रैली के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न जागरूकतापरक नारों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, खुलकर संवाद करने तथा अपनी समस्याओं को साझा करने का संदेश दिया। इस पहल का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक संकोच एवं पूर्वाग्रहों को दूर करना तथा आमजन में संवेदनशीलता, समझ एवं सहयोग की भावना विकसित करना था।
कार्यक्रम में आयोजन समिति के सदस्यों, वरिष्ठ प्राध्यापकों, अन्य प्राध्यापकों एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही। समग्र रूप से यह आयोजन मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के प्रसार, मनोवैज्ञानिक समस्याओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने तथा संवाद एवं परामर्श की संस्कृति को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।
कार्यक्रम ने यह संदेश प्रभावी रूप से प्रसारित किया कि मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं पर मौन रहने के बजाय संवाद स्थापित करना, एक-दूसरे की भावनाओं को समझना तथा आवश्यकता पड़ने पर उचित सहायता एवं परामर्श प्राप्त करना स्वस्थ, संवेदनशील एवं सहयोगपूर्ण समाज के निर्माण के लिए आवश्यक है।


