दुर्लभ गिलहरियों का शिकार: शिकारियों की हिमाकत तो देखिये, पहले दुर्लभ प्रजाति की गिलहरियों को मारा, फिर नक्सली हिड़मा के गाने पर Reel बनाकर इंस्टाग्राम पर डाला, शिकारी गिरफ्तार

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दंतेवाड़ा 8 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में वन्यजीवों के शिकार का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने जंगलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सिर्फ शिकार का नहीं, बल्कि उस लापरवाही और बेखौफ मानसिकता का है, जिसमें आरोपी खुद अपने अपराध का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालते हैं।

पूरा खेल Instagram की एक रील से खुला। वीडियो में दो युवक 9 मृत भारतीय विशाल गिलहरी के साथ नजर आए—एक ऐसी प्रजाति, जिसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत सर्वोच्च सुरक्षा मिली हुई है। सवाल यह है कि जब कानून इतना सख्त है, तो फिर ऐसे शिकारी इतने बेखौफ कैसे?

वीडियो सामने आते ही वन विभाग हरकत में आया, लेकिन यह भी सच है कि अगर आरोपी खुद रील बनाकर पोस्ट नहीं करते, तो शायद यह मामला भी जंगल की खामोशी में दफन हो जाता। जांच के बाद मुख्य आरोपी बंशीराम कोवासी को बारसूर इलाके से गिरफ्तार किया गया। उसके घर से स्लॉथ भालू की खाल और शिकार के फंदे बरामद होना इस बात का सबूत है कि यह कोई एक दिन का अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित और लगातार चलने वाला खेल है। मिली जानकारी के मुताबिक 11 लोगों ने गुलेल के जरिये इन दुर्लभ प्रजाति की गिलहरियों का शिकार किया था।

आरोपी ने कबूल किया कि उसने गिलहरियों का शिकार ‘बुश मीट’ के लिए किया। यानी स्वाद और लालच के लिए जंगल के संतुलन को बेरहमी से खत्म किया जा रहा है। यह सिर्फ एक जानवर की हत्या नहीं, बल्कि पूरे इकोसिस्टम पर हमला है।भारतीय विशाल गिलहरी जंगलों के लिए बेहद अहम प्रजाति है—यह बीज फैलाती है, नए पेड़ों को जन्म देती है और जंगल को जिंदा रखती है। ऐसे में इसका शिकार सीधे-सीधे पर्यावरण के खिलाफ अपराध है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सिर्फ एक गिरफ्तारी से यह सिलसिला थम जाएगा? वन विभाग ने बाकी आरोपियों की तलाश की बात जरूर कही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ऐसे गिरोह लंबे समय से सक्रिय हैं और अक्सर पकड़ से बाहर रहते हैं।

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