बिलासपुर, 20 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश के विभिन्न सरकारी महाविद्यालयों में कार्यरत 18 सहायक प्राध्यापकों के अकादमिक ग्रेड पे और बकाया राशि से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने राज्य शासन को संबंधित प्राध्यापकों की पात्रता की जांच कर नियमानुसार निर्णय लेने को कहा है।
जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की पीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए कहा कि यदि याचिकाकर्ता पूर्व में तय लोकमणि यादव एवं अन्य बनाम छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य मामले में शामिल कर्मचारियों के समान स्थिति में पाए जाते हैं, तो उनकी मांग पर उसी आदेश के आधार पर विचार किया जाए।
प्रदेश के कई जिलों में पदस्थ हैं प्राध्यापक
इन 18 सहायक प्राध्यापकों की पदस्थापना बिलासपुर, रायगढ़, जांजगीर-चांपा, रायपुर, बालोद, कोरिया और दुर्ग सहित प्रदेश के विभिन्न सरकारी महाविद्यालयों में है। इनमें वनस्पति शास्त्र, हिंदी, प्राणी शास्त्र, भूगोल, वाणिज्य, अंग्रेजी, रसायन शास्त्र और अर्थशास्त्र जैसे विषयों के प्राध्यापक शामिल हैं।
अकादमिक ग्रेड पे और एरियर की मांग
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अकादमिक ग्रेड पे का लाभ देने के साथ उससे संबंधित बकाया राशि यानी एरियर के भुगतान की मांग की थी। सुनवाई के दौरान उनके अधिवक्ता विजय के. देशमुख ने पूर्व में हाईकोर्ट द्वारा लोकमणि यादव प्रकरण में दिए गए आदेश का हवाला दिया।
25 जून 2024 को दिए गए उस आदेश में संबंधित कर्मचारियों की पात्रता की जांच के लिए समिति गठित करने के निर्देश दिए गए थे।
एक महीने में समिति, तीन महीने में जांच
पूर्व आदेश के अनुसार उच्च शिक्षा विभाग के सचिव को आदेश की प्रति मिलने के एक महीने के भीतर समिति गठित करनी थी। समिति को प्रत्येक याचिकाकर्ता की पात्रता की जांच करनी थी और इसके बाद तीन महीने के भीतर अकादमिक ग्रेड पे देने की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए थे।
यदि संबंधित कर्मचारी पात्र पाए जाते हैं, तो उन्हें जिस तारीख से अकादमिक ग्रेड पे की पात्रता बनती है, उसी तारीख से लाभ देने और बकाया राशि का भुगतान करने का प्रावधान किया गया था।
पात्रता के बाद ही मिलेगा लाभ
हाईकोर्ट ने वर्तमान मामले में स्पष्ट किया है कि केवल याचिका दायर करने के आधार पर अकादमिक ग्रेड पे का लाभ स्वतः नहीं मिलेगा। पहले यह निर्धारित किया जाएगा कि संबंधित 18 सहायक प्राध्यापक लोकमणि यादव मामले में शामिल कर्मचारियों के समान स्थिति में हैं या नहीं।
पात्रता साबित होने के बाद ही अकादमिक ग्रेड पे और एरियर के संबंध में नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा।
मामले में राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा संचालनालय, उच्च शिक्षा आयुक्त और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को पक्षकार बनाया गया था। राज्य की ओर से पैनल अधिवक्ता अनादि शर्मा और यूजीसी की ओर से अधिवक्ता जेएन नांदे ने पक्ष रखा।
मुख्य बात: हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब 18 सहायक प्राध्यापकों के मामलों में पात्रता की जांच होगी। पात्र पाए जाने पर उन्हें नियमानुसार अकादमिक ग्रेड पे और संबंधित बकाया राशि का लाभ मिल सकेगा।

