मुंबई, 2 जून 2026। बॉलीवुड अभिनेत्री Kiara Advani ने प्रेग्नेंसी और मातृत्व के बाद महिलाओं को झेलने पड़ने वाले सामाजिक दबाव तथा बॉडी शेमिंग के मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी है। एक हालिया इंटरव्यू में कियारा ने बताया कि समाज महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान सम्मान और सराहना देता है, लेकिन बच्चे के जन्म के बाद अचानक उनसे पुरानी फिटनेस और दिनचर्या में लौटने की अपेक्षा करने लगता है।
डिलीवरी के बाद बदल जाता है समाज का नजरिया
कियारा आडवाणी ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की खूब प्रशंसा की जाती है। लोग उनके चेहरे की चमक और मातृत्व की खूबसूरती की तारीफ करते हैं, लेकिन बच्चे के जन्म के बाद वही लोग महिला के वजन, शारीरिक बदलाव और लुक्स पर टिप्पणी करने लगते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी टिप्पणियां नई माताओं के आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।
“प्रेग्नेंसी में देवी, बाद में उम्मीदों का बोझ”
कियारा ने समाज की दोहरी मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को विशेष सम्मान मिलता है, लेकिन डिलीवरी के तुरंत बाद उनसे यह उम्मीद की जाती है कि वे जल्द से जल्द पहले जैसी फिटनेस हासिल कर लें और कामकाज में लौट आएं।
अभिनेत्री के अनुसार, बच्चे के जन्म के बाद का समय महिलाओं के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे समय में उन्हें समर्थन, समझ और देखभाल की आवश्यकता होती है, न कि आलोचना और अनावश्यक अपेक्षाओं की।
कामकाजी महिलाओं के सामने बड़ी चुनौती
कियारा के बयान ने सोशल मीडिया और कामकाजी महिलाओं के बीच नई चर्चा को जन्म दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिलीवरी के बाद महिलाओं पर तेजी से वजन कम करने और पेशेवर जीवन में जल्द वापसी का दबाव बढ़ता जा रहा है।
फिल्म इंडस्ट्री से लेकर कॉर्पोरेट क्षेत्र तक, कई महिलाएं इस तरह की सामाजिक अपेक्षाओं का सामना करती हैं। ऐसे में मातृत्व के बाद महिलाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर मिल रही प्रतिक्रिया
कियारा आडवाणी की इस टिप्पणी को सोशल मीडिया पर व्यापक समर्थन मिल रहा है। कई महिलाओं ने उनके विचारों से सहमति जताते हुए कहा कि मातृत्व के बाद महिलाओं को सहानुभूति, समय और सहयोग की जरूरत होती है, न कि उनके शरीर और रूप-रंग पर होने वाली टिप्पणियों की।
निष्कर्ष
कियारा आडवाणी का यह बयान मातृत्व के बाद महिलाओं के सामने आने वाली वास्तविक चुनौतियों को सामने लाता है। यह समाज को यह सोचने का अवसर देता है कि नई माताओं से अवास्तविक अपेक्षाएं रखने के बजाय उन्हें भावनात्मक और सामाजिक सहयोग प्रदान किया जाए, ताकि वे स्वस्थ और आत्मविश्वास के साथ अपने नए जीवन की शुरुआत कर सकें।


