केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह नेतानार से करेंगे अभियान का शुभारंभ
रायपुर, 17 मई 2026। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खिलाफ लंबे समय से चल रहे अभियान के बाद अब विकास और जनसुविधाओं का नया दौर शुरू होने जा रहा है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के लिए बनाए गए सीआरपीएफ कैंपों को धीरे-धीरे आम जनता के लिए समर्पित किया जाएगा। इन कैंपों को स्कूल, अस्पताल, आंगनबाड़ी, जन सुविधा केंद्र और लघु वनोपज संग्रहण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक पहल की शुरुआत 18 मई को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah बस्तर के नेतानार गांव से करेंगे।
सरकार की योजना के अनुसार बस्तर में बने लगभग 400 कैंपों को चरणबद्ध तरीके से जनकल्याण केंद्रों में बदला जाएगा। वर्तमान में इन कैंपों में आधे हिस्से में सुरक्षा बल और बाकी हिस्से में जनसुविधा केंद्र संचालित किए जाएंगे। अगले एक वर्ष में सुरक्षा बलों को धीरे-धीरे अन्य बेस कैंपों में स्थानांतरित कर दिया जाएगा और पूरी इमारत जनता की सुविधाओं के लिए समर्पित हो जाएगी।
नक्सल प्रभावित इलाकों में बढ़ा सुरक्षा ढांचा
जानकारी के मुताबिक वर्ष 2024 से अब तक बस्तर में 110 नए सीआरपीएफ कैंप स्थापित किए गए हैं। इससे पहले यहां 290 कैंप संचालित थे। नए कैंप उन दूरस्थ और अत्यधिक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में खोले गए, जहां पहले सुरक्षा बलों की पहुंच बेहद कठिन मानी जाती थी।
आंकड़ों के अनुसार:
- वर्ष 2024 में 43 कैंप
- वर्ष 2025 में 60 कैंप
- वर्ष 2026 में अब तक 7 कैंप स्थापित किए गए।
इन कैंपों में 8 से 15 बैरक, बोरवेल और शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। मजबूत संरचना वाली इन इमारतों का उपयोग अब स्थानीय लोगों के विकास और सुविधा के लिए किया जाएगा।
बस्तर में पहली बार होगी मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक
बस्तर में 26वीं मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक भी आयोजित होने जा रही है, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। बैठक में छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शामिल होंगे। इसके साथ ही प्रत्येक राज्य के दो-दो मंत्री भी बैठक में भाग लेंगे।
इस बैठक का उद्देश्य राज्यों के बीच आपसी समन्वय बढ़ाना और लंबित विवादों का समाधान करना है। बैठक के माध्यम से सरकार यह संदेश देने का प्रयास कर रही है कि बस्तर अब नक्सलवाद से बाहर निकलकर विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है।
शहीदों को नमन करेंगे अमित शाह
जगदलपुर स्थित अमर वाटिका में केंद्रीय गृह मंत्री 1402 शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद वे बादल अकादमी में अधिकारियों, नक्सल पीड़ित परिवारों, शहीदों के परिजनों और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। कार्यक्रम में पूर्व नक्सली नेताओं से भी संवाद की संभावना जताई जा रही है, ताकि बस्तर के विकास और सामाजिक पुनर्वास को लेकर सुझाव लिए जा सकें।
नेतानार से शुरुआत का विशेष महत्व
नेतानार गांव बस्तर के महान आदिवासी क्रांतिकारी शहीद वीर गुंडाधुर की जन्मभूमि माना जाता है। वर्ष 1910 में अंग्रेजों के खिलाफ हुए ऐतिहासिक भूमकाल विद्रोह के नायक वीर गुंडाधुर आज भी बस्तर में सम्मान और श्रद्धा के प्रतीक हैं। उन्होंने आदिवासियों को संगठित कर शोषण के खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा किया था।
इसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस नई विकास पहल की शुरुआत नेतानार से करने का निर्णय लिया है।
छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री Vijay Sharma ने कहा कि बस्तर में कैंपों को जनसुविधा केंद्रों में बदलना बदलाव की नई शुरुआत है और इससे स्थानीय लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी सुविधाएं सीधे गांवों में उपलब्ध हो सकेंगी।


