
जनजातीय समुदाय की आजीविका सुदृढ़ करने पर दिया गया विशेष जोर
दुर्ग, 27 मार्च 2026।
दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति घटक (आदिवासी उपयोजना), शिक्षा, योजना एवं गृह विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित पांच दिवसीय वैज्ञानिक सूकर पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन किया गया। यह प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (नई दिल्ली) के सहयोग से संचालित टी.एस.पी. प्रोजेक्ट के तहत आयोजित किया गया।
📌 प्रशिक्षण की प्रमुख जानकारी
- अवधि: 23 मार्च से 27 मार्च 2026
- प्रतिभागी: 50 किसान
- क्षेत्र: कोंडागांव जिले के नाहकानार, चेमा, आदनार, बादालूर, मर्दापाल, रानापाल एवं हथकली गांव
- मार्गदर्शन: निदेशालय विस्तार शिक्षा
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य जनजातीय समुदाय की आजीविका सुरक्षा में सुधार लाना एवं उन्नत सूकर पालन तकनीकों का प्रसार करना रहा।
🐖 क्या-क्या सिखाया गया प्रशिक्षण में
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को निम्न विषयों पर सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक जानकारी दी गई—
- उन्नत सूकर नस्ल प्रबंधन
- संतुलित आहार एवं पोषण
- आवास एवं प्रबंधन प्रणाली
- रोग नियंत्रण एवं टीकाकरण
- जैव सुरक्षा उपाय
- लागत-लाभ विश्लेषण
- विपणन एवं उद्यमिता विकास
🎤 मुख्य अतिथि का संबोधन
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलपति डॉ. आर.आर.बी. सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक सूकर पालन जनजातीय समुदाय के लिए आय वृद्धि का प्रभावी साधन है और इसे अपनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।
👥 विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में निम्न अतिथि उपस्थित रहे—
- अधिष्ठाता डॉ. एस. पाल
- कुलसचिव डॉ. बी.पी. राठिया
- निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. एम.के. गेंदले
- जनसंपर्क अधिकारी डॉ. दिलीप चौधरी
साथ ही डॉ. रामचन्द्र रामटेके, डॉ. मेहताब सिंह परमार, श्री संजीव जैन एवं अर्चना खोब्रागड़े की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।
💬 किसानों का अनुभव
प्रशिक्षण में शामिल किसानों ने बताया कि उन्हें आधुनिक एवं वैज्ञानिक सूकर पालन की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई है। विशेष रूप से प्रायोगिक सत्र और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन को उन्होंने अत्यंत उपयोगी बताया, जिससे भविष्य में बेहतर उत्पादन और आय की संभावना बढ़ेगी।
🏁 आयोजन में प्रमुख भूमिका
- प्रशिक्षण आयोजन सचिव: डॉ. एस.के. वर्मा
- प्रमुख अन्वेषक: डॉ. अमित कुमार गुप्ता
- संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन: डॉ. जागृति कृष्णन
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
🔚 निष्कर्ष
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जनजातीय क्षेत्रों में आधुनिक कृषि एवं पशुपालन तकनीकों के प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ है, जिससे किसानों की आय वृद्धि एवं आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा।
अगर चाहें तो मैं इसे ई-पेपर डिज़ाइन (हेडलाइन + बॉक्स + हाइलाइट्स) या सोशल मीडिया पोस्ट फॉर्मेट में भी तैयार कर सकता हूँ।

