उच्च शिक्षा में दो साल का लेखा जोखा: कॉलेज-यूनिवर्सिटी में होगी प्रोफेसर से लेकर टेक्निशियन तक की भर्ती, NAAC मूल्यांकन से लेकर बजट व शैक्षणिक व्यवस्था में व्यापक सुधार

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छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा विभाग ने बीते दो वर्षों में बजट, शैक्षणिक सुधार, नियुक्तियों और शोध–कौशल विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। बजट में 50 प्रतिशत वृद्धि, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का व्यापक क्रियान्वयन और पीएम-उषा जैसी योजनाओं से विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों को नई मजबूती मिली है।

रायपुर 7 जनवरी 2026। छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ और आधुनिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा व्यापक स्तर पर कदम उठाए गए हैं। वर्ष 2023-24 में उच्च शिक्षा विभाग का बजट 1212.75 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1822.75 करोड़ रुपये हो गया है। इस प्रकार लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसे उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे, गुणवत्ता और नवाचार को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। उच्च शिक्षा मंत्री ने दो साल की उपलब्धि का ब्योरा मीडिया के साथ साझा किया।

उन्होंने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2024-25 से प्रदेश के 9 राजकीय विश्वविद्यालयों में से 7 विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) का क्रियान्वयन किया गया है। इसके तहत 42 स्किल एन्हांसमेंट कोर्स, जैसे गार्डनिंग, मल्टीमीडिया एवं एनिमेशन, 108 जेनेरिक इलेक्टिव कोर्स तथा एबिलिटी एन्हांसमेंट कोर्स विकसित किए गए हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उद्योगों के साथ समन्वय बढ़ाने के उद्देश्य से रुसा कार्यालय में दो सदस्यीय रिसर्च क्वालिटी इंडस्ट्रियल एकेडमिया कोलैबोरेशन सेल (RQIACC) का गठन किया गया है। साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।

मानव संसाधन के क्षेत्र में भी विभाग ने महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। वर्ष 2025 में 366 सहायक प्राध्यापकों को प्राध्यापक पद पर पदोन्नति दी गई है। इसके अलावा 151 स्नातक प्राचार्य और 7 स्नातकोत्तर प्राचार्यों को भी पदोन्नत किया गया है। प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में प्राध्यापकों के 595 पदों पर सीधी भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। साथ ही 625 सहायक प्राध्यापक, 50 ग्रंथपाल और 25 क्रीडाधिकारी पदों पर भी भर्ती प्रक्रियाधीन है। प्रयोगशाला तकनीशियन के 233 पदों पर भर्ती पूरी हो चुकी है, जबकि प्रयोगशाला परिचारक के 430 पदों पर व्यापम द्वारा परीक्षा आयोजित कर परिणाम जारी किया जा चुका है।

गुणवत्ता सुधार की दिशा में नैक (NAAC) मूल्यांकन को भी गति मिली है। प्रदेश के 343 शासकीय महाविद्यालयों में से 254 नैक मूल्यांकन के योग्य हैं, जिनमें से 200 का मूल्यांकन पूरा हो चुका है। 9 राजकीय विश्वविद्यालयों में से 5 का नैक मूल्यांकन हो चुका है। प्रदेश के 2 राजकीय विश्वविद्यालय, 1 निजी विश्वविद्यालय और 1 शासकीय महाविद्यालय को ए-प्लस ग्रेड प्राप्त हुआ है, जबकि अन्य संस्थानों को भी उच्च ग्रेड मिले हैं।

छात्रों की संख्या और नामांकन बढ़ाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान सकल नामांकन अनुपात (GER) 27.5 प्रतिशत है, जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत वर्ष 2035 तक 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए पोषक शाला संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। सत्र 2024-25 में शासकीय महाविद्यालयों में कुल 2,95,743 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।

इन्फ्रास्ट्रक्चर और शोध को बढ़ावा देने के लिए पीएम-उषा योजना के अंतर्गत शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर को 100 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है। वहीं रायपुर, बिलासपुर और मुक्त विश्वविद्यालय को 20-20 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके अतिरिक्त 12 महाविद्यालयों को 5-5 करोड़ रुपये का अनुदान मिला है।

डिजिटल प्रशासन के लिए ई-ऑफिस प्रणाली लागू की गई है और छात्रवृत्तियों का वितरण पोर्टल के माध्यम से किया जा रहा है। आगामी तीन वर्षों के लिए छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा मिशन के तहत गुड गवर्नेंस, इन्फ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्री पर केंद्रित कार्ययोजना बनाई गई है। इन प्रयासों से प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी और रोजगारोन्मुखी बनाने की दिशा में ठोस आधार तैयार हो रहा है।

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