चिट्टा केस में नया मोड़: युवक ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप, SSP से की निष्पक्ष जांच की मांग

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दुर्ग-भिलाई। दुर्ग जिले में चर्चित चिट्टा (नशीले पदार्थ) मामले में दो पुलिस अधिकारियों के निलंबन के बाद अब पूरे प्रकरण में नया मोड़ आ गया है। मामले में गिरफ्तार महिला के एक परिचित युवक ने पुलिसकर्मियों पर अवैध हिरासत, मारपीट, दो लाख रुपये की मांग और कॉल रिकॉर्डिंग डिलीट करवाने के लिए दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। युवक ने इस संबंध में दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल को लिखित शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

पहले ही निलंबित हो चुके हैं दो उप निरीक्षक

गौरतलब है कि आरोपी पक्ष से कथित रूप से पैसों की मांग से जुड़े वीडियो और ऑडियो सामने आने के बाद एसएसपी ने पुरानी भिलाई थाना में पदस्थ उप निरीक्षक तुलसीराम साहू तथा खुर्सीपार थाना में पदस्थ उप निरीक्षक देवलाल साहू को निलंबित कर रक्षित केंद्र अटैच कर दिया था। साथ ही पूरे मामले की विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं।

महिला की मदद करने गया था युवक

शिकायतकर्ता सुनील महाराणा के अनुसार, 1 जून को उसकी परिचित महिला ने उसे साथ चलने का अनुरोध किया था। महिला का कहना था कि एक व्यक्ति के पास मोबाइल के बदले दिया गया पैसा फंसा हुआ है, जिसे वापस लेना है। वाहन उपलब्ध नहीं होने के कारण सुनील उसके साथ सिरसा गेट क्षेत्र पहुंचा।

सुनील के मुताबिक वहां अमित नामक युवक से मोबाइल और पैसों को लेकर बातचीत हुई। पहले 2000 रुपये लौटाने की बात थी, लेकिन सामने वाला 1500 रुपये देने पर अड़ा हुआ था, जिससे विवाद और बहस की स्थिति बन गई।

सिविल ड्रेस में पहुंचे लोग, खुद को बताया क्राइम ब्रांच का कर्मचारी

शिकायत में सुनील ने आरोप लगाया है कि विवाद के दौरान कुछ लोग सिविल ड्रेस में वहां पहुंचे और स्वयं को क्राइम ब्रांच का कर्मचारी बताया। इसके बाद उसे और अन्य लोगों को अपने साथ ले जाया गया। उसका दावा है कि उसे भिलाई-3 थाना ले जाकर पूछताछ की गई, जबकि जिस व्यक्ति को लेकर विवाद था, उसे बाद में छोड़ दिया गया।

“जिसके पास पुड़िया मिली, उसे छोड़ दिया गया”

शिकायतकर्ता का आरोप है कि अमित नामक युवक के पास से कथित रूप से नशीला पदार्थ मिला था, लेकिन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके विपरीत उसे थाने लाकर पूछताछ और मारपीट का सामना करना पड़ा। सुनील का कहना है कि उसने पुलिस को स्पष्ट बताया था कि उसका इस पूरे मामले से कोई संबंध नहीं है और वह केवल महिला की सहायता के लिए वहां गया था।

दो लाख रुपये मांगने और झूठे केस में फंसाने की धमकी का आरोप

सुनील महाराणा ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि पुलिसकर्मियों ने उसे छोड़ने के बदले दो लाख रुपये की मांग की। पैसे नहीं देने पर गांजा और चिट्टा मामले में फंसाकर 10 साल तक जेल भेजने की धमकी दी गई। उसने यह भी दावा किया कि हिरासत के दौरान उसके साथ मारपीट की गई और कई घंटों तक हथकड़ी पहनाकर रखा गया।

कॉल रिकॉर्डिंग डिलीट कराने का भी आरोप

युवक ने आरोप लगाया कि पुलिस को जब यह जानकारी मिली कि गिरफ्तार महिला रज्जो कौर की बेटी जसबीर कौर के पास कथित पैसों की मांग से जुड़ी रिकॉर्डिंग मौजूद है, तब उसे इस शर्त पर छोड़ा गया कि वह सभी रिकॉर्डिंग डिलीट कराएगा। साथ ही किसी को जानकारी देने पर दूसरे मामलों में फंसाने की धमकी भी दी गई।

रज्जो कौर की बेटी ने भी उठाए सवाल

मामले में जेल में बंद रज्जो कौर की बेटी जसबीर कौर ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि वास्तविक आरोपी को मौके से छोड़ दिया गया, जबकि निर्दोष लोगों को परेशान किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी मां के पास मौजूद 40 हजार रुपये भी ले लिए गए।

SSP से निष्पक्ष जांच की मांग

सुनील महाराणा ने एसएसपी विजय अग्रवाल से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, कथित मारपीट, अवैध हिरासत, पैसों की मांग और झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच जारी है।

क्राइम डीएसपी का बयान

वहीं, इस मामले में क्राइम डीएसपी यदुमणि सिदार ने कहा है कि उक्त कार्रवाई में एसीसीयू (क्राइम ब्रांच) का कोई भी कर्मचारी शामिल नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके स्टाफ का इस मामले से कोई संबंध नहीं है। फिलहाल शिकायत और लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है।

(नोट: शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की जांच जारी है और अंतिम तथ्य जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।)

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