
बिलासपुर मई 2026। गंभीर बीमारी से जूझ रही एक शिक्षिका को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। तीसरे चरण के कैंसर से पीड़ित शिक्षिका द्वारा गृह जिले में तबादले की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग को मानवीय आधार पर विचार करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्कूल शिक्षा सचिव को आदेश दिया है कि शिक्षिका के अभ्यावेदन पर तीन सप्ताह के भीतर समुचित निर्णय लिया जाए।
मामले की सुनवाई पार्थ प्रतीम साहू की एकलपीठ में हुई। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभाग को संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेने की बात कही।याचिकाकर्ता किरण साहू वर्तमान में सरगुजा जिले के सीतापुर विकासखंड अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला कुधारापानी में पदस्थ हैं। याचिका के अनुसार, उन्हें बड़ी आंत और मलाशय के बीच तीसरे चरण का कैंसर है। उनकी हालत गंभीर है और लंबे समय से उनका इलाज नया रायपुर स्थित बालको कैंसर अस्पताल में चल रहा है।
दस्तावेजों के अनुसार, अब तक शिक्षिका की पांच बार कीमोथेरेपी हो चुकी है। वहीं 5 मई 2026 को उन्हें छठवीं कीमोथेरेपी के लिए फिर से अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लगातार इलाज और शारीरिक कमजोरी के कारण सरगुजा से नया रायपुर तक आना-जाना उनके लिए बेहद कठिन हो गया है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए शिक्षिका ने अपने अधिवक्ता रामचरण साहू के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि यदि उनका तबादला उनके गृह जिला महासमुंद या उसके आसपास कर दिया जाए तो इलाज और स्वास्थ्य संबंधी देखभाल में काफी सुविधा होगी। साथ ही परिवार का सहयोग मिलने से मानसिक और शारीरिक रूप से भी राहत मिलेगी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष यह भी तर्क रखा गया कि गंभीर बीमारी की स्थिति में दूरस्थ क्षेत्र में पदस्थापना मानवीय दृष्टिकोण से उचित नहीं है। ऐसे मामलों में सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए राहत प्रदान करनी चाहिए।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने शिक्षिका को निर्देश दिया कि वे स्कूल शिक्षा सचिव के समक्ष अपना विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत करें। साथ ही कोर्ट ने स्कूल शिक्षा सचिव को आदेशित किया कि अभ्यावेदन प्राप्त होने के तीन सप्ताह के भीतर नियमानुसार विचार कर उचित निर्णय लिया जाए।
हाईकोर्ट के इस आदेश को मानवीय संवेदनाओं और कर्मचारी हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है। आमतौर पर गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कर्मचारियों को दूरस्थ क्षेत्रों में पदस्थ रहने के कारण कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अदालत का यह निर्देश राहत भरा माना जा रहा है।
