
सुकमा, छत्तीसगढ़ | 20 मई 2026
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के दूरस्थ मारोकी गांव से ग्रामीणों की पीड़ा भरी एक अनोखी मांग सामने आई है। गांव के लोगों ने केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के नाम कलेक्टर के माध्यम से आवेदन भेजकर गांव के लिए हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने की मांग की है। यह आवेदन अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इलाके की बदहाल सड़क व्यवस्था की पोल खोल रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बनने वाली सड़क पिछले 10 वर्षों से अधूरी पड़ी हुई है। करीब 10 किलोमीटर तक केवल गिट्टी बिछी होने के कारण लोगों का पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। बरसात के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जिससे गांव तक स्वास्थ्य सेवाएं और जरूरी सुविधाएं पहुंचाना बड़ी चुनौती बन गया है।
मरीजों को खाट पर ढोने की मजबूरी
ग्रामीणों के मुताबिक गांव के आगे पहाड़ी इलाका होने की वजह से परेशानी और बढ़ जाती है। कई बार गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को खाट पर लादकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है। वहां तक अगर एम्बुलेंस पहुंच जाए तो राहत मिलती है, अन्यथा बाइक के सहारे मरीजों को गादीरास तक ले जाना पड़ता है।
गांव के उपसरपंच शंकर ने बताया कि वर्षों से सड़क निर्माण पूरा होने का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। उनका कहना है कि पहले नक्सल प्रभाव के कारण सड़क निर्माण प्रभावित था, लेकिन अब हालात सामान्य होने के बावजूद काम पूरा नहीं हो पाया।
मीडिया टीम को भी झेलनी पड़ी परेशानी
ग्रामीणों की समस्या जानने गांव पहुंची मीडिया टीम को भी रास्ते में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। गिट्टी और उबड़-खाबड़ रास्तों के कारण वाहन खराब होने का खतरा लगातार बना रहा। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ग्रामीण रोजमर्रा की जिंदगी में कितनी कठिनाइयों से गुजर रहे हैं।
जून तक सड़क पूरी करने का दावा
मामले में PMGSY के ईई रविंद्र ताती ने कहा कि सुरक्षा कारणों के चलते लंबे समय तक सड़क निर्माण प्रभावित रहा। हालांकि अब हालात बेहतर हैं और जून महीने तक गांव में सड़क सुविधा पूरी तरह उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई ग्रामीणों की पीड़ा
हेलीकॉप्टर की मांग वाला आवेदन भले ही लोगों को अनोखा लग रहा हो, लेकिन इसके पीछे गांव की वर्षों पुरानी पीड़ा और बुनियादी सुविधाओं की कमी साफ दिखाई दे रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान कब तक कर पाता है।

