
रायपुर, 15 जुलाई। छत्तीसगढ़ सरकार ने कैदियों के सुधार और पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए राज्य की पहली ओपन जेल (खुली जेल) बेमेतरा जिले के पथर्रा गांव में शुरू कर दी है। जेल विभाग ने इसके संचालन का आदेश जारी कर दिया है। लगभग 23 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस खुली जेल में अच्छे आचरण वाले 200 आजीवन कारावास प्राप्त कैदियों को परिवार सहित रहने और कृषि, पशुपालन सहित अन्य आजीविका गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
सुधार और पुनर्वास पर रहेगा जोर
खुली जेल का उद्देश्य कैदियों को केवल सजा देना नहीं, बल्कि उनके व्यवहार में सुधार लाकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। यहां पारंपरिक जेलों की तरह ऊंची दीवारें, लोहे की सलाखें, कंटीले तार और हथियारबंद सुरक्षा व्यवस्था नहीं होगी। पूरी व्यवस्था कैदियों के आत्म-अनुशासन, जिम्मेदारी और विश्वास पर आधारित रहेगी।
हर कैदी को नहीं मिलेगी सुविधा
इस जेल में केवल उन्हीं कैदियों को स्थान मिलेगा जिनका बंद जेल में अनुशासन और व्यवहार उत्कृष्ट रहा हो तथा जो आदतन अपराधी न हों। आमतौर पर ऐसे कैदियों को, जिनकी सजा के अंतिम एक-दो वर्ष शेष हों, समाज में पुनर्वास की तैयारी के तहत यहां भेजा जाएगा।
कृषि और पशुपालन से जुड़ेंगे कैदी
ओपन जेल में रहने वाले कैदी खेती, बागवानी, पशुपालन और अन्य उत्पादक कार्यों में भाग ले सकेंगे। इससे उन्हें आत्मनिर्भर बनने, मानसिक तनाव कम करने और रिहाई के बाद सामान्य जीवन अपनाने में मदद मिलेगी। साथ ही परिवार के साथ रहने की सुविधा उनके सामाजिक और भावनात्मक पुनर्वास को भी मजबूत करेगी।
राज्य में सुधारात्मक न्याय व्यवस्था की नई पहल
विशेषज्ञों के अनुसार, ओपन जेल की अवधारणा देश के कई राज्यों में सफल रही है। छत्तीसगढ़ में इसकी शुरुआत को सुधारात्मक न्याय प्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे कैदियों के पुनर्वास के साथ-साथ समाज में अपराध की पुनरावृत्ति कम करने में भी मदद मिलेगी।


