
दुर्ग। शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय (साइंस कॉलेज), दुर्ग के 20 प्राध्यापकों को छत्तीसगढ़ के विभिन्न विषयों के केंद्रीय अध्ययन मंडल में शामिल किया गया है। ये प्राध्यापक राज्य के महाविद्यालयों के लिए पाठ्यक्रम निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अध्ययन मंडल का कार्यकाल तीन वर्ष निर्धारित किया गया है।
छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 की धारा 34 (क) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए राज्यपाल एवं कुलाधिपति द्वारा विभिन्न संकायों में केंद्रीय अध्ययन मंडलों का गठन किया गया है। इस संबंध में 23 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित छत्तीसगढ़ राजपत्र (असाधारण) में अधिसूचना जारी की गई है। इसके अनुसार साइंस कॉलेज दुर्ग के 20 प्राध्यापकों को विभिन्न विषयों के अध्ययन मंडलों में स्थान दिया गया है।
इन विषयों के प्राध्यापकों को मिली जिम्मेदारी
केंद्रीय अध्ययन मंडल में भौतिक शास्त्र से डॉ. जगजीत कौर सलूजा, भूगर्भशास्त्र से डॉ. एस.डी. देशमुख एवं डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव, वाणिज्य से डॉ. सुमीत अग्रवाल, संस्कृत से डॉ. जनेन्द्र दीवान, भूगोल से डॉ. अनिल मिश्रा, इतिहास से डॉ. अनिल पाण्डेय तथा राजनीति शास्त्र से डॉ. शकील हुसैन को शामिल किया गया है।
इसी प्रकार मनोविज्ञान से डॉ. रचिता श्रीवास्तव, गणित से डॉ. पद्मावती, रसायन शास्त्र से डॉ. सुनीता मैथ्यू एवं प्रोफेसर उपमा श्रीवास्तव, प्राणीशास्त्र से डॉ. दिव्या कुमुदिनी मिंज, डॉ. संजू सिन्हा एवं डॉ. अलका मिश्रा को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसके अलावा बायोटेक्नोलॉजी से डॉ. श्वेता पाण्डेय, माइक्रोबायोलॉजी से डॉ. प्रज्ञा कुलकर्णी, कंप्यूटर साइंस से डॉ. सनत साहू एवं डॉ. दिलीप साहू तथा पर्यावरण अध्ययन से डॉ. जी.एस. ठाकुर को केंद्रीय अध्ययन मंडल में शामिल किया गया है।
प्राचार्य ने जताई प्रसन्नता
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय कुमार सिंह ने कॉलेज के 20 प्राध्यापकों को केंद्रीय अध्ययन मंडल में शामिल किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विभिन्न विषयों के अध्ययन मंडलों में प्राध्यापकों की भागीदारी से राज्य के महाविद्यालयों के पाठ्यक्रम निर्माण में महाविद्यालय का महत्वपूर्ण योगदान रहेगा। यह उपलब्धि महाविद्यालय की शैक्षणिक विशेषज्ञता और अकादमिक सहभागिता को भी मजबूत करेगी।*
