कवर्धा-कांकेर से अमेरिका जाती है तिलापिया मछली, युद्ध से थमा निर्यात: 20 हजार टन स्टॉक अटका, 200 करोड़ के नुकसान का खतरा

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रायपुर |

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव का असर अब छत्तीसगढ़ के मत्स्य उद्योग पर भी साफ दिखाई देने लगा है। राज्य के कवर्धा, कांकेर और कोरबा जिलों में बड़े पैमाने पर उत्पादित तिलापिया मछली का निर्यात पिछले एक महीने से पूरी तरह ठप हो गया है।

स्थिति यह है कि करीब 20 हजार टन तिलापिया मछली तालाबों और बांधों में ही फंसी हुई है, जिससे मछुआरों और व्यापारियों को 200 करोड़ रुपए से अधिक के संभावित नुकसान का अंदेशा है।


📊 निर्यात पर युद्ध का असर

छत्तीसगढ़ से हर साल बड़ी मात्रा में तिलापिया मछली का निर्यात मुख्य रूप से अमेरिका को किया जाता है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते लॉजिस्टिक और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो गई हैं।

मछुआरों के अनुसार, पिछले दो महीनों से निर्यात में गिरावट आई थी, जबकि पिछले एक महीने से यह पूरी तरह बंद हो चुका है।


🐟 कहां होता है उत्पादन

राज्य के प्रमुख जलाशयों में तिलापिया मछली का पालन किया जाता है, जिनमें शामिल हैं—

  • कांकेर का दुधावा बांध
  • कोरबा का बांगो बांध
  • कवर्धा का सरोदा बांध

यहां से मछलियां कंपनियों द्वारा खरीदी जाती हैं और फिर कोलकाता व विशाखापट्टनम बंदरगाह के जरिए अमेरिका भेजी जाती हैं।


💰 कीमत का गणित

  • मछुआरों से खरीद: ₹105–110 प्रति किलो
  • निर्यात कीमत: ₹170 प्रति किलो
  • अमेरिका में बिक्री: ₹250–300 प्रति किलो

अमेरिका में तिलापिया को “एक्वाटिक चिकन” के नाम से जाना जाता है, जहां इसकी भारी मांग है।


📦 क्यों फंसी मछलियां

तिलापिया मछली को खास तौर पर निर्यात के लिए तैयार किया जाता है।

  • आदर्श वजन: 500–800 ग्राम
  • वर्तमान स्थिति: मछलियों का वजन बढ़कर निर्यात सीमा पार कर रहा

यदि समय पर निर्यात नहीं हुआ, तो मछलियां ओवरसाइज होने या मरने का खतरा बढ़ जाएगा, जिससे नुकसान और बढ़ सकता है।


⚠️ मछुआरों की बढ़ती चिंता

स्थानीय मछुआरे राकेश निषाद के अनुसार:

“दो महीने से कारोबार प्रभावित था, लेकिन अब पूरी तरह बंद है। समझ नहीं आ रहा कि नए बीज डालें या नहीं। अगर मछलियां ज्यादा बड़ी हो गईं तो खरीददार नहीं मिलेंगे।”


🌍 वैश्विक बाजार का असर

अमेरिका अपनी तिलापिया की जरूरत का करीब 95% आयात चीन, ताइवान और भारत से करता है।
हाल ही में चीन से आने वाले समुद्री उत्पादों पर भारी टैक्स लगने के बाद भारत से निर्यात बढ़ा था, लेकिन मौजूदा युद्ध स्थिति ने इस मौके को भी प्रभावित कर दिया।


🏛️ सरकार की पहल

राज्य सरकार तिलापिया उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मछुआरों को

  • केज कल्चर पर सब्सिडी
  • तकनीकी सहायता
    दे रही है।

मत्स्य पालन विभाग के संचालक एन.एस. नाग के अनुसार,

“उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन निर्यात रुकने से संकट की स्थिति बन गई है।”


🔍 आगे क्या?

यदि आने वाले 1–2 महीनों में अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं हुए, तो

  • मछलियों का स्टॉक बेकार हो सकता है
  • मछुआरों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा
  • नए उत्पादन चक्र पर भी असर पड़ेगा

📌
वैश्विक राजनीतिक तनाव का सीधा असर अब स्थानीय अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। छत्तीसगढ़ का मत्स्य उद्योग इस समय गंभीर चुनौती से गुजर रहा है, जहां समय पर समाधान नहीं मिलने पर स्थिति और बिगड़ सकती है।

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