एमसीटी केस में हाईकोर्ट सख्त — अपील में नए साक्ष्य स्वीकार नहीं, परिवार को अतिरिक्त मुआवजा देने के निर्देश*
बिलासपुर | 7 अप्रैल 2026
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने मोटर दुर्घटना मुआवजा (MACT) मामले में अहम फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी है। साथ ही मृतक के परिजनों को मिलने वाले मुआवजे में बढ़ोतरी का आदेश दिया है।
यह फैसला न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल की एकल पीठ ने 2 अप्रैल 2026 को सुनाया।
क्या है पूरा मामला
मामला मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT), कोरबा के एक फैसले से जुड़ा था, जिसमें मृतक रामसाई कंवर के परिवार को मुआवजा देने का आदेश दिया गया था।
बीमा कंपनी यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
बीमा कंपनी की दलील क्यों खारिज हुई*
बीमा कंपनी ने अपील के दौरान यह तर्क दिया कि:
- मृतक वाहन में पीछे बैठा यात्री था
- बीमा पॉलिसी केवल “देयता आधारित” (Liability Only) थी
- इसलिए मुआवजा देय नहीं है
साथ ही कंपनी ने:
- नए दस्तावेज पेश करने
- लिखित बयान में संशोधन करने
की अनुमति भी मांगी।
👉 लेकिन हाईकोर्ट ने साफ कहा:
- ये तर्क ट्रिब्यूनल में पहले नहीं उठाए गए थे
- अपील स्तर पर नए साक्ष्य पेश करने की अनुमति नहीं दी जा सकती
- जब मामला रिकॉर्ड के आधार पर तय हो सकता है, तो अतिरिक्त साक्ष्य स्वीकार नहीं होंगे
इसी आधार पर कोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी।
मुआवजे में कितनी हुई बढ़ोतरी
दावेदारों (परिवार) की ओर से मुआवजा बढ़ाने की मांग पर कोर्ट ने आंशिक राहत दी।
कोर्ट ने पाया कि:
- ट्रिब्यूनल ने “पैरेंटल कंसोर्टियम” (माता-पिता के स्नेह/संरक्षण) के तहत पर्याप्त राशि नहीं दी थी
👉 इसलिए कोर्ट ने आदेश दिया:*
- मृतक के तीन बच्चों को ₹40,000-₹40,000
- कुल अतिरिक्त मुआवजा: ₹1.20 लाख
➡️ पहले का मुआवजा: ₹45.57 लाख
➡️ नया कुल मुआवजा: ₹46.77 लाख
ब्याज और भुगतान का आदेश
हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि:
- बढ़ी हुई राशि 7% वार्षिक ब्याज के साथ दी जाए
- भुगतान दावा याचिका की तारीख से गणना कर किया जाए
- पूरी राशि 30 दिनों के भीतर जमा की जाए
कोर्ट की अहम टिप्पणी*
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में महत्वपूर्ण सिद्धांत दोहराया:
- अपीलीय अदालत में नए बचाव या साक्ष्य पेश करने का स्वतः अधिकार नहीं होता
- केवल वही मुद्दे स्वीकार होंगे जो मूल सुनवाई में उठाए गए हों
केस डिटेल*
- केस: MAC No. 1459/2019
- पक्षकार: यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम मिलापा बाई एवं अन्य
- अपीलकर्ता के वकील: दशरथ गुप्ता
- प्रतिवादी के वकील: आशुतोष शुक्ला, नेहा खांडेकर
यह फैसला न केवल बीमा कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण संदेश देता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि:
- पीड़ित परिवारों को न्यायपूर्ण मुआवजा मिले
- अपील प्रक्रिया का दुरुपयोग कर नए तर्क पेश न किए जा सकें*

