पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश सरकार से शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के संदर्भ में शिक्षकों के हितों की रक्षा हेतु रिव्यू या क्यूरेटिव पिटीशन दायर करने की सलाह दी है।

Teacher TET News: कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह अब शिक्षक के समर्थन में उतर आये हैं। TET की अनिवार्यता को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। दरअसल टीईटी की अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम के आदेश के बाद देश भर के शिक्षकों में डर का माहौल है। इसी मुद्दे को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर राज्य के लाखों शिक्षकों की चिंताओं को सामने रखा है। उन्होंने अपने पत्र में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर राज्य सरकार से पुनर्विचार करने की अपील की है।
दिग्विजय सिंह ने पत्र में उल्लेख किया है कि प्रदेश के शासकीय स्कूलों में कार्यरत दो लाख से अधिक शिक्षक इस समय असमंजस और चिंता की स्थिति में हैं। इसका मुख्य कारण सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय के बाद टीईटी को अनिवार्य किए जाने की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि यदि इस निर्णय को वर्तमान शिक्षकों पर भूतलक्षी (retrospective) प्रभाव से लागू किया जाता है, तो इससे हजारों शिक्षकों की नौकरी पर संकट खड़ा हो सकता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन या क्यूरेटिव पिटीशन दायर कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि टीईटी की अनिवार्यता को भविष्यलक्षी (prospective) प्रभाव से लागू किया जाए। इससे वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों के हित सुरक्षित रहेंगे और उन्हें अनावश्यक तनाव से राहत मिलेगी।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि कोई शिक्षक टीईटी परीक्षा में सफल नहीं हो पाता है, तो उसकी सेवा समाप्ति या समयपूर्व सेवानिवृत्ति जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इस आशंका के कारण शिक्षकों में व्यापक चिंता और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
दिग्विजय सिंह ने यह भी तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट का जो निर्णय सामने आया है, वह मूल रूप से महाराष्ट्र राज्य से संबंधित था, और मध्य प्रदेश इस मामले में प्रत्यक्ष पक्षकार नहीं था। इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जो कई सवाल खड़े करती है।
उन्होंने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश में पहले से ही मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से टीईटी के समान एक परीक्षा प्रणाली लागू है, जिसके आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति की जाती रही है। ऐसे में नई अनिवार्यता लागू करने से व्यवस्था में भ्रम और असंतोष बढ़ सकता है।
दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे इस संवेदनशील मुद्दे पर गंभीरता से विचार करें और शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लें। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था की मजबूती के लिए शिक्षकों का मनोबल बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।


