छत्तीसगढ़ विधानसभा में अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण का मुद्दा गरमा गया। सरकार ने स्पष्ट किया कि फिलहाल नियमित करने की कोई योजना नहीं है, जिसके बाद विपक्ष ने हंगामा कर वॉकआउट किया।

रायपुर 18 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज अतिथि शिक्षकों का मुद्दा जोरदार तरीके से गूंजा। नियमितीकरण को लेकर सरकार की नीति पर विपक्ष ने तीखे सवाल उठाए, जिसके चलते सदन का माहौल गरमा गया और अंततः विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया।
नियमितीकरण पर सरकार का आया जवाब
कांग्रेस विधायक विक्रम मांडवी ने सदन में सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या राज्य सरकार अतिथि शिक्षकों को नियमित करने के लिए कोई कार्ययोजना बना रही है। इसके जवाब में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने स्पष्ट रूप से कहा कि फिलहाल ऐसी कोई योजना सरकार के पास नहीं है।मंत्री के इस जवाब के बाद विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी और सरकार पर अपने वादों से पीछे हटने का आरोप लगाया।
वेतन और भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल
सदन में अतिथि शिक्षकों को दिए जाने वाले मानदेय और भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए। विधायक विक्रम मांडवी ने पूछा कि अतिथि शिक्षकों को कितना वेतन दिया जा रहा है और उनकी नियुक्ति किस आधार पर की जाती है।इस पर मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि अतिथि शिक्षकों को प्रति माह 20 हजार रुपये का मानदेय दिया जाता है। इसके साथ ही उनकी उपस्थिति (अटेंडेंस) के आधार पर भुगतान की व्यवस्था भी पहले से निर्धारित है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे प्रदेश में सभी अतिथि शिक्षकों को समान मानदेय दिया जा रहा है।
‘मोदी की गारंटी’ पर सियासत
इस मुद्दे पर विपक्ष ने केंद्र सरकार के चुनावी वादों का भी हवाला दिया। कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने कहा कि अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण का वादा “मोदी की गारंटी” में किया गया था और सरकार को बताना चाहिए कि यह वादा कब तक पूरा होगा।इस पर मंत्री ने जवाब दिया कि सरकार अपने वादों को पूरा कर रही है और आगे भी करती रहेगी, लेकिन उन्होंने नियमितीकरण को लेकर कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं बताई।
सदन में नारेबाजी और हंगामा
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी विधायकों ने सदन में नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान सदन का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। विपक्ष का आरोप था कि सरकार अतिथि शिक्षकों के भविष्य को लेकर गंभीर नहीं है और उन्हें स्थायी समाधान देने से बच रही है।
विपक्ष का वॉकआउट
लगातार हंगामे के बीच विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन (वॉकआउट) कर दिया। विपक्षी नेताओं का कहना था कि जब तक सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट नीति नहीं बनाती, तब तक वे इस मुद्दे को उठाते रहेंगे।अतिथि शिक्षकों का मुद्दा अब प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा विषय बनता जा रहा है। हजारों अतिथि शिक्षक लंबे समय से नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं और इसको लेकर समय-समय पर आंदोलन भी करते रहे हैं।

