
रायपुर |
छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती 2023 को लेकर आदिवासी डीएड अभ्यर्थियों का आक्रोश अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। रिक्त पड़े 1600 अनुसूचित जनजाति पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर हजारों अभ्यर्थियों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को स्पीड पोस्ट के जरिए पत्र भेजकर हस्तक्षेप की अपील की है।
न्यायालयों के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं होने से नाराज अभ्यर्थी और उनके परिजन बीते 24 दिसंबर से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है।
2300 पदों में 1600 आदिवासी, फिर भी नियुक्ति अधर में
अभ्यर्थियों का कहना है कि सहायक शिक्षक भर्ती 2023 में कुल 2300 पद स्वीकृत थे, जिनमें से लगभग 1600 पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित थे। इसके बावजूद आज तक इन पदों पर नियुक्ति नहीं की गई, जिससे आदिवासी समाज में भारी असंतोष है।
अभ्यर्थियों ने सवाल उठाया है कि आदिवासी मुख्यमंत्री की सरकार में ही आदिवासी युवाओं को रोजगार के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है।
कोर्ट के आदेशों की अनदेखी का आरोप
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया को लेकर
हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल 2024 और 26 सितंबर 2025,
जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 28 अगस्त 2024 को स्पष्ट आदेश दिए थे।
इसके बावजूद शासन और शिक्षा विभाग द्वारा आदेशों का पालन नहीं किया गया, जो न्यायालय की अवहेलना और संविधान की भावना के विपरीत है।
अनशन के दौरान बिगड़ी 200 से ज्यादा युवाओं की तबीयत
लंबे समय से जारी आमरण अनशन अब स्वास्थ्य संकट में बदलता जा रहा है। आंदोलन के दौरान 200 से अधिक अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ चुकी है, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। कई युवाओं की स्थिति गंभीर बताई जा रही है।
रोजगार न मिलने से गहराया सामाजिक-आर्थिक संकट
आदिवासी संगठनों का कहना है कि वर्षों की पढ़ाई, प्रशिक्षण और पात्रता के बावजूद रोजगार से वंचित रहना युवाओं और उनके परिवारों को गंभीर सामाजिक व आर्थिक संकट की ओर धकेल रहा है।
अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें
सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के तहत रिक्त 1600 आदिवासी पदों पर तत्काल नियुक्ति
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पूर्ण पालन
आमरण अनशन पर बैठे अभ्यर्थियों की स्वास्थ्य व सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार ले
नियुक्ति में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई
आंदोलन और उग्र करने की चेतावनी
आदिवासी संगठनों और अभ्यर्थियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक व उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


