मोटर एक्सीडेंट ट्रिब्यूनल ने मृतक की आय का आंकलन कम किया, हाईकोर्ट ने बढ़ाया मुआवजा

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बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ट्रक दुर्घटना में किशोर की मौत के मामले में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) द्वारा मृतक की आय का कम आंकलन किए जाने को गलत ठहराते हुए मुआवजे की राशि में बड़ी बढ़ोतरी की है। कोर्ट ने साढ़े तीन लाख रुपये के मुआवजे के आदेश को निरस्त कर मृतक के आश्रितों को 13 लाख 9 हजार रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
मामले के अनुसार, 4 फरवरी 2018 को सुबह करीब 9 बजे नैला निवासी प्रशांत यादव (17 वर्ष), पिता प्रकाश यादव, साइकिल से नैला रेलवे स्टेशन से अपने घर लौट रहा था। इसी दौरान ट्रक क्रमांक सीजी-14-ए-1591 के चालक ने लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए उसे टक्कर मार दी। हादसे में प्रशांत को गंभीर चोटें आईं और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
दुर्घटना के बाद मृतक के पिता प्रकाश यादव और मां ने मोटर दुर्घटना दावा याचिका दायर की थी। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण, जांजगीर-चांपा ने मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर कुल 3 लाख 50 हजार रुपये का मुआवजा 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने का आदेश दिया था। इसमें से वाहन मालिक द्वारा पूर्व में दिए गए 2 लाख रुपये घटाकर बीमा कंपनी को शेष 1 लाख 50 हजार रुपये भुगतान करने के निर्देश दिए गए थे, साथ ही दोषी चालक और वाहन मालिक से वसूली की स्वतंत्रता भी दी गई थी।
इस आदेश के खिलाफ मृतक के माता-पिता ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। सुनवाई के बाद जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की एकलपीठ ने ट्रिब्यूनल के आदेश को आंशिक रूप से निरस्त करते हुए मुआवजे की राशि में संशोधन किया।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ट्रिब्यूनल द्वारा अनुमान के आधार पर मृतक की आय का आकलन कम किया गया है। यदि दुर्घटना की तारीख पर लागू न्यूनतम मजदूरी के प्रावधानों को देखा जाए, तो मृतक एक मजदूर के रूप में आसानी से 7,930 रुपये प्रतिमाह कमा सकता था। इसी आधार पर मृतक की मासिक आय 7,930 रुपये तय की गई।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि दुर्घटना के समय मृतक की उम्र लगभग 17 वर्ष थी, इसलिए लागू मल्टीप्लायर 18 होगा। साथ ही ट्रिब्यूनल द्वारा भविष्य की संभावनाओं का लाभ नहीं देना भी त्रुटिपूर्ण है। चूंकि मृतक की उम्र 40 वर्ष से कम थी, इसलिए 40 प्रतिशत भविष्य की संभावनाएं जोड़ना उचित है।
इन सभी आधारों पर हाईकोर्ट ने कुल मुआवजा राशि बढ़ाकर 13 लाख 9 हजार रुपये निर्धारित की है, जिससे मृतक के आश्रितों को न्यायोचित राहत मिल सके।

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