इथियोपिया में इबोला-जैसे वायरस की आशंका, WHO का अलर्ट

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नई दिल्ली । डेस्क: इथियोपिया में इबोला-सम्बंधित एक खतरनाक वायरस के संभावित संक्रमण को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने गंभीर चिंता व्यक्त की है. संगठन के अनुसार, शुरुआती जांच में इस वायरस के लक्षण अत्यंत घातक प्रतीत हो रहे हैं और इसके तेज़ी से फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. हालांकि अभी तक व्यापक स्तर पर संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हालात को हल्के में लेने की कोई गुंजाइश नहीं है.

WHO ने बताया कि संदिग्ध मरीजों में तेज़ बुखार, उल्टी, दस्त, शरीर में तेज़ दर्द और कुछ मामलों में रक्तस्राव जैसे लक्षण देखे गए हैं, जो इबोला वायरस समूह से मेल खाते हैं. इथियोपिया की स्वास्थ्य एजेंसियों ने संदिग्ध नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेज दिया है और संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आए लोगों की पहचान कर निगरानी शुरू कर दी गई है.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इबोला-सम्बंधित वायरस आमतौर पर जानवरों से इंसानों में फैलते हैं और बाद में मानव-से-मानव संक्रमण का रूप ले सकते हैं. अफ्रीका के कई देशों में पहले भी ऐसे प्रकोप सामने आ चुके हैं, जिनसे जनस्वास्थ्य को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए WHO ने इथियोपिया में त्वरित और प्रभावी रोकथाम उपायों पर ज़ोर दिया है.

इथियोपिया सरकार ने स्थिति को देखते हुए सतर्कता बढ़ा दी है. त्वरित पहचान, मरीजों का आइसोलेशन, संक्रमण नियंत्रण और जनजागरूकता अभियानों को तेज़ किया गया है. साथ ही सीमावर्ती इलाकों में निगरानी कड़ी करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वायरस अन्य देशों तक न फैल सके.

इथियोपिया के स्वास्थ्य मंत्रालय ने जनता से अपील की है कि घबराने के बजाय सतर्क रहें. नियमित रूप से हाथ धोने, बीमार व्यक्तियों के संपर्क से बचने और किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेने की सलाह दी गई है. स्वास्थ्यकर्मियों के लिए पर्याप्त व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) भी उपलब्ध कराए गए हैं.

वैश्विक जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के वायरस से निपटने के लिए समय पर और पारदर्शी सूचना साझा करना तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित कार्रवाई सबसे प्रभावी उपाय है. WHO लगातार स्थिति पर नज़र बनाए हुए है और ज़रूरत पड़ने पर और कड़े कदम उठाने की तैयारी में है.

विशेषज्ञों के अनुसार, बदलते पर्यावरण और जैविक परिस्थितियों के साथ नए वायरस तेज़ी से विकसित हो रहे हैं. ऐसे में शुरुआती चेतावनी और सतर्कता ही किसी भी संभावित महामारी को रोकने का सबसे मजबूत हथियार साबित हो सकती है.

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