सांदीपनी एकेडमी अछोटी में दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का शुभारंभ

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दुर्ग। सांदीपनी एकेडमी अछोटी दुर्ग में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी (हाइब्रिड मोड) का शुभारंभ 9 जनवरी 2026 को किया गया। संगोष्ठी का विषय ‘परंपरा और प्रौद्योगिकी का सेतु भारतीय ज्ञान परंपरा के दृष्टिकोण से कृत्रिम बुद्धिमत्ता रहा। इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक
तकनीक के बीच समन्वय स्थापित कर शिक्षा, शोध एवं नवाचार को वैश्विक मंच प्रदान करना था। इस संगोष्ठी का आयोजन सांदीपनी एकेडमी अगेटी, वितराग रिसर्च फाउंडेशन तथा प्रगति कॉलेज, रायपुर (छत्तीसगढ) के संयुक्त तत्वाधान में किया जा रहा है। संगोष्ठी में देश-विदेश के शिक्षाविदों,
शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न परिप्रेक्ष्यो पर पेपर प्रेजेंट किए।

संगोष्ठी के प्रथम दिवस का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उद्‌घाटन सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. भूपेंद्र कुलदीप, विशिष्ट अतिथि डॉ. ढोगेंद्र सिंह गंजीर एवं विशेष अतिथि डॉ. शिशिरकर्ण भ‌ट्टाचार्य उपस्थित रहे। स्वागत भाषण संरक्षक प्राचार्या डॉ. स्वाति श्रीवास्तव के द्वारा दिया गया। डॉ. दिव्या शर्मा मुख्य संरक्षक द्वारा कार्यक्रम का परिचय दिया गया, आयोन सचिव डॉ. गुंजन शर्मा द्वारा कार्यक्रम की रूप रेखा प्रस्तुत की गई। मुख्य अतिथि डॉ. भूपेंद्र कुलदीप ने अपने वक्तव्य में भारतीय ज्ञान प्रणाली की वैज्ञानिक सोच और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ उसके उपयोग पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपराओं में निहित ज्ञान आधुनिक तकनीक को नैतिक एवं मानवीय दृष्टिकोण प्रदान कर सकता है।

विशिष्ट अतिथि डॉ. डोमेंद्र सिंह गंजीर ने शोध एवं नवाचार के महत्व पर बल देते हुए कहा कि इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियाँ शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को वैश्विक सोच से जोडने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती

प्रथम दिवस के तकनीकी सत्रों में श्री ईशु आनंद जायसवाल (एक्स एप्पल), नागेंद्र यादव (अमेरिका), डॉ. अंकित राजपाल (दिल्ली), डॉ. अश्विनी कुमार राय (दिल्ली) एवं प्रो. डॉ. पायल अरोड़ा (नीदरलैंड) द्वारा शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इन प्रस्तुतियों में भारतीय ज्ञान परंपरा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, शिक्षा में तकनीक की भूमिका, नवाचार एवं नैतिक मूल्यों जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। प्रत्येक सत्र के पश्चात प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता की।

संगोष्ठी में देश-विदेश के शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न परिप्रेक्ष्यों पर अपनी प्रस्तुति दिए। संयोजक डॉ. संध्या पुजारी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन दिया गया। सम्पूर्ण संगोष्ठी का मंच संचालन संयोजक डॉ. रोली तिवारी, भावना क्षत्रिय एवं डॉ. मीना पाण्डेय द्वारा किया गया।

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