महिला शक्ति के नेतृत्व में गूँजा “विकसित भारत” का संकल्प: शासकीय महाविद्यालय, वैशाली नगर में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस संपन्न

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इंदिरा गाँधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, वैशाली नगर में छत्तीसगढ़ काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (CCOST) के सौजन्य से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय विज्ञान दिवस समारोह का भव्य समापन हुआ। इस वर्ष का कार्यक्रम भारत सरकार द्वारा निर्धारित थीम “Women in Science: Catalysing Viksit Bharat” (विज्ञान में महिलाएँ: विकसित भारत के लिए उत्प्रेरक) पर केंद्रित रहा।

कार्यक्रम के पहले दिन विद्यार्थियों के बीच विज्ञान के प्रति रुचि जगाने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इसमें पोस्टर मेकिंग, क्विज और मॉडल मेकिंग , भाषण प्रतियोगिता, निबंध लेखन प्रतियोगिता जैसी गतिविधियाँ शामिल रहीं, जहाँ विद्यार्थियों ने अपनी वैज्ञानिक सोच और नवाचार का प्रदर्शन किया। इस आयोजन की यह विशेषता रही कि इसमें महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के साथ-साथ महाविद्यालय के पोषक विद्यालय के विद्यार्थियों ने भी भाग लिया।

कार्यक्रम के दूसरे दिन औपचारिक रूप से समापन समारोह का आयोजन किया गया , जिसकी विशेष बात यह रही कि मंच का नेतृत्व तीन सशक्त महिला विशेषज्ञों (समन्वयक, प्राचार्य और विशिष्ठ अतिथि) ने किया, जिन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की अपरिहार्य भूमिका को रेखांकित किया। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत और दीप प्रज्वलन के साथ हुई।

“कार्यक्रम समन्वयक विज्ञान संकाय की प्रमुख डॉ नीता डेनियल ने CCOST के सहयोग और कार्यक्रम के उद्देश्य को रेखांकित करते हुए अपने व्याख्यान में भारतीय महिला वैज्ञानिकों के योगदान पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने प्रसिद्ध वनस्पति वैज्ञानिक जानकी अम्मल से लेकर’मिसाइल वुमन’ टेसी थॉमस तक की यात्रा का वर्णन करते हुए बताया कि कैसे इन महिलाओं ने भारतीय विज्ञान के ‘केमिकल स्ट्रक्चर’ को बदला है। उन्होंने नंदिनी हरिनाथ और रितु करिधल जैसी महिला वैज्ञानिकों का जिक्र करते हुए बताया कि मंगलयान मिशन की सफलता में महिलाओं ने एक ‘सशक्त कैटालिस्ट’ की भूमिका निभाई, जिससे भारत पहले ही प्रयास में मंगल पर पहुँच गया। उन्होंने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि ‘विकसित भारत’ के निर्माण के लिए हमें केवल विज्ञान पढ़ना नहीं है, बल्कि भारतीय महिला वैज्ञानिकों की तरह विज्ञान को जीना होगा।”

प्राचार्या महोदया डॉ अल्का मेश्राम ने स्वागत उदबोधन में अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे एक महिला, प्रशासनिक और वैज्ञानिक दोनों मोर्चों पर कुशलता से कार्य कर सकती है। उन्होंने कहा कि “विकसित भारत” का कैटालिस्ट (उत्प्रेरक) वह आत्मविश्वास है, जो एक छात्रा को कॉलेज की लैब से प्राप्त होता है। विज्ञान हमारे लिए केवल एक विषय नहीं, बल्कि हमारे संस्कारों का हिस्सा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रामायण से लेकर आधुनिक अंतरिक्ष अभियानों तक, भारत का वैज्ञानिक सफर निरंतर रहा है। उन्होंने छोटे-छोटे ग्रामीण उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य केवल बड़े शहरों से नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर महिलाओं की वैज्ञानिक भागीदारी से प्राप्त होगा।

विशिष्ठ अतिथि एवं मुख्य वक्ता डॉ.सीमा गुप्ता, प्राचार्या ,शासकीय नागरिक कल्याण महाविद्यालय अहिवारा ने अपने सारगर्भित व्याख्यान में बताया कि जब एक महिला, वैज्ञानिक बनती है, तो वह केवल शोध नहीं करती, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के व्यवहार (Behavioral Science) में वैज्ञानिक चेतना का संचार करती है।” उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि ‘विकसित भारत’ के निर्माण के लिए हमें अपने राष्ट्र के ‘Intellectual DNA’ में महिलाओं की वैज्ञानिक मेधा को सम्मिलित करना होगा। एवं इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए छात्राओं को STEM (Science, Technology, Engineering, Maths) के क्षेत्र में आ रही बाधाओं को पार कर आगे आना होगा। उन्होंने स्वास्थ्य और वैक्सीन विज्ञान में महिलाओं के योगदान को मील का पत्थर बताया।

मुख्य वक्ता के व्याख्यान पूर्व उनका परिचय डाॅ शिखा श्रीवास्तव जूलॉजी विभाग की प्रमुख ने दिया तथा उनके वक्तव्य हेतु आभार प्रदर्शन डाॅ सुरेश ठाकुर ने किया।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन सुश्री शैल शर्मा, आई क्यू ए सी समनव्यक एव्ं आयोजक सचिव द्वारा किया गया । इस अवसर पर वरिष्ठ प्राध्यापक डाॅ कैलाश शर्मा, विज्ञान संकाय से डाॅ अल्पा श्रीवास्तव, डाॅ संतोष अग्रवाल, डाॅ अजय मनहर, डाॅ निशा गुप्ता , तकनीकी विशेषज्ञ श्री रूपेश परमार सहित महाविद्यालय के सभी संकायों के समस्त प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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