
रायपुर। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने और पत्राचार माध्यम से बीएड कोर्स शुरू कराने की मांग को लेकर शिक्षा विभाग को विस्तृत ज्ञापन सौंपा। प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने लोक शिक्षण संचालनालय के अधिकारियों से मुलाकात कर शिक्षकों से जुड़ी विभिन्न व्यावहारिक समस्याओं पर चर्चा की।
प्रतिनिधिमंडल ने लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक ऋतुराज रघुवंशी और सहायक संचालक अशोक नारायण बंजारा से मुलाकात कर बताया कि 17 अगस्त 2012 के नियमों के तहत शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किया गया है, जबकि इससे पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर यह शर्त लागू नहीं की जानी चाहिए। संगठन ने पुराने शिक्षकों को टीईटी से छूट देने की मांग दोहराई।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार की मांग
एसोसिएशन ने 1 सितंबर 2025 को आए Supreme Court of India के निर्णय के संदर्भ में हस्तक्षेप या पुनर्विचार याचिका दायर करने की आवश्यकता बताई। संगठन का कहना है कि यदि पुनर्विचार संभव न हो, तो सेवारत शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए विभागीय स्तर पर सीमित टीईटी परीक्षा आयोजित की जाए।
विभागीय सीमित टीईटी परीक्षा का खाका
ज्ञापन में प्रस्ताव रखा गया कि विभागीय सीमित टीईटी परीक्षा का संयोजन डीपीआई स्तर से हो तथा प्रत्येक जिले में जिला शिक्षा अधिकारी परीक्षा संयोजक की भूमिका निभाएं। संगठन ने तर्क दिया कि पदोन्नति के लिए पूर्व में ऐसी विभागीय सीमित परीक्षाएं सफलतापूर्वक आयोजित की जा चुकी हैं, इसलिए यह मॉडल व्यवहारिक और प्रभावी रहेगा।
पत्राचार से 6 माह का बीएड कोर्स शुरू करने का सुझाव
एसोसिएशन ने यह भी प्रस्ताव रखा कि सहायक शिक्षक, शिक्षक और व्याख्याता, जिनके पास केवल डीएड या समकक्ष योग्यता है, उनके लिए एनसीटीई के नियमों के अनुरूप 6 माह का बीएड कोर्स प्रारंभ किया जाए। इसके लिए पंडित सुंदरलाल शर्मा विश्वविद्यालय के साथ अनुबंध कर छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (ओपन बोर्ड) को पाठ्यक्रम संचालन की जिम्मेदारी देने का सुझाव रखा गया, ताकि संपर्क कक्षाओं के माध्यम से पत्राचार पद्धति से बीएड शीघ्र पूर्ण कराया जा सके।
विभाग ने सकारात्मक रुख के संकेत दिए
चर्चा के दौरान संचालक ऋतुराज रघुवंशी ने कहा कि विभागीय टीईटी परीक्षा और पत्राचार से बीएड कराने का सुझाव शिक्षक हित में है। उन्होंने संकेत दिया कि पात्रता और दक्षता सुनिश्चित करते हुए शिक्षकों को सरल एवं व्यवहारिक विकल्प उपलब्ध कराने पर विभाग स्तर पर विचार किया जा सकता है।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल पदाधिकारी
ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश संयोजक सुधीर प्रधान, प्रदेश उपाध्यक्ष देवनाथ साहू, बसंत चतुर्वेदी, प्रदेश पदाधिकारी योगेश सिंह ठाकुर, जितेंद्र मिश्रा, बिलासपुर जिलाध्यक्ष संतोष सिंह, धमतरी जिलाध्यक्ष डॉ. भूषण चंद्राकर, महासमुंद जिलाध्यक्ष नारायण चौधरी, बालोद जिलाध्यक्ष दिलीप साहू और आशीष गुप्ता सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
शिक्षक संगठन की इन मांगों पर अब शिक्षा विभाग के स्तर पर मंथन तेज हो गया है और आने वाले दिनों में इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकता है।

