CGVSK ऐप के जरिए ऑनलाइन बायोमेट्रिक उपस्थिति को लेकर एक सहायक शिक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। शिक्षक द्वारा तकनीकी, साइबर सुरक्षा और संसाधनों की कमी से जुड़े सवाल उठाने पर विभाग ने इसे शासन निर्देशों की अवहेलना और अनुशासनहीनता मानते हुए तीन दिन में स्पष्टीकरण तलब किया है।
राजनांदगांव 13 जनवरी 2026।छत्तीसगढ़ में शासकीय विद्यालयों में ऑनलाइन बायोमेट्रिक उपस्थिति व्यवस्था और CGVSK ऐप को लेकर विवाद सामने आया है। राजनांदगांव जिले के विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) द्वारा एक सहायक शिक्षक को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है। यह नोटिस पूनम सिंह, सहायक शिक्षक, शासकीय प्राथमिक शाला क्रमांक 06, इंग्नाइट गंजपारा, संकुल गजपारा, विकासखंड व जिला राजनांदगांव को जारी किया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सहायक शिक्षक पूनम सिंह ने विभाग को एक लिखित सूचना पत्र भेजा था, जिसमें उन्होंने ऑनलाइन बायोमेट्रिक उपस्थिति के लिए CGVSK ऐप के उपयोग को लेकर अपनी व्यावहारिक और सुरक्षा संबंधी समस्याएं रखी थीं। शिक्षक ने पत्र में उल्लेख किया था कि उनका व्यक्तिगत मोबाइल फोन पुरानी तकनीक का है, जो विभागीय ऐप के लिए अनुकूल नहीं है। इस कारण CGVSK ऐप उनके मोबाइल में इंस्टॉल नहीं हो पा रहा है और तकनीकी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
इसके अलावा शिक्षक ने यह भी लिखा था कि उनके निजी मोबाइल फोन में बैंकिंग से जुड़ी जानकारी और पारिवारिक तस्वीरें मौजूद हैं। ऐसे में किसी सरकारी ऐप को पूर्ण एक्सेस देने से बैंकिंग फ्रॉड, डेटा चोरी, डीप फेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दुरुपयोग और साइबर खतरे की आशंका बनी रहती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि वर्तमान में उनके पास विभागीय कार्यों के लिए कोई शासकीय मोबाइल, टैबलेट या बायोमेट्रिक डिवाइस उपलब्ध नहीं है, जिससे वे ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कर सकें।
इन्हीं कारणों के आधार पर पूनम सिंह ने शासन से आग्रह किया था कि ऑनलाइन बायोमेट्रिक उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए उन्हें आधिकारिक टैबलेट या मोबाइल तथा डेटा सिम उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे शासन के निर्देशों का पूर्ण पालन कर सकें। साथ ही, संसाधन उपलब्ध होने तक पूर्व की तरह उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करने की अनुमति देने का अनुरोध भी किया गया था।
हालांकि विकासखंड शिक्षा अधिकारी राजनांदगांव ने शिक्षक के इस पत्र के बाद शिक्षिका को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि शिक्षिका द्वारा की गई टिप्पणी शासन द्वारा जारी नियम-निर्देशों का पालन न करने की श्रेणी में आती है और यह अन्य कर्मचारियों को भड़काने जैसा कृत्य भी माना जा सकता है। नोटिस में यह भी उल्लेख है कि CGVSK ऐप शासन द्वारा सुरक्षित और आधुनिक तरीके से निर्मित किया गया है, ऐसे में इसे असुरक्षित या साइबर खतरा बताना सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की अवहेलना के अंतर्गत आता है।
बीईओ ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि शासकीय संसाधन उपलब्ध कराने की मांग करना शासन नियमों का उल्लंघन है और यह अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने की मंशा को दर्शाता है। विभाग के अनुसार यह आचरण कार्य के प्रति उदासीनता, कर्तव्यहीनता और शासन के निर्देशों के प्रति लापरवाही को दर्शाता है, जो सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 3 के विपरीत है।
नोटिस में सहायक शिक्षक को निर्देश दिया गया है कि वे तीन दिवस के भीतर स्वयं उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। यदि प्रस्तुत स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया, तो उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र प्रेषित किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित शिक्षक की होगी।
BEO के खिलाफ हल्ला बोल- सुशील शर्मा
इधर, शालेय शिक्षक संघ ने इस कार्रवाई की तीखी निंदा की है। शालेय शिक्षक संघ राजनांदगांव के जिला उपाध्यक्ष सुशील शर्मा ने तीव्र निंदा करते हुए कहा है कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी राजनांदगांव की कार्रवाई तानाशाही है। इसे लेकर शालेय शिक्षक संघ प्रदर्शन करेगा। उन्होंने कहा कि CGVSK एप्प इनस्टॉल नहीं करने वाली शिक्षिका के खिलाफ बीईओ ने अव्यव्हारिक रूप से स्पस्टीकरण जारी किया है। इस कार्रवाई के विरोध में 15/1/26 को BEO के खिलाफ हल्ला बोल होगा। शाम 4.30 बजे बीईओ कार्यालय के बाहर शिक्षक तीखा विरोध जतायेंगे।


