
एजेंसी | नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को चेक बाउंस मामलों में क्षेत्राधिकार को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि अकाउंट पेयी चेक बाउंस होने की स्थिति में शिकायत सिर्फ उसी कोर्ट में दर्ज की जा सकती है, जिसके क्षेत्र में पेयी (जिसके नाम पर चेक है) का बैंक खाता स्थित है।
अदालत ने कहा कि यदि चेक किसी दूसरी ब्रांच में जमा किया गया हो, तब भी कानूनी प्रक्रिया उसी कोर्ट में चलेगी जो पेयी की होम ब्रांच के क्षेत्राधिकार में आती है।
यह फैसला जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 142(2)(a) की व्याख्या करते हुए सुनाया। कोर्ट ने याद दिलाया कि वर्ष 2015 के संशोधन में यह प्रावधान जोड़ा गया था कि किसी भी ब्रांच में चेक जमा करना, उसे पेयी की होम ब्रांच में जमा किए जाने के समान ही माना जाएगा।
अदालत के अनुसार, इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य फोरम शॉपिंग (सुविधा के अनुसार कोर्ट चुनने की प्रवृत्ति) को रोकना और मामलों में एकरूपता बनाए रखना है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि क्षेत्राधिकार तय करने का आधार पेयी के खाते वाली बैंक शाखा होगी, न कि वह बैंक जहां चेक वास्तव में जमा किया गया था।
इस निर्णय से चेक बाउंस मामलों में अनावश्यक भ्रम समाप्त होगा और न्यायिक प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित हो सकेगी।

