संlदीपनी अकादमी, अछोटी (नर्सिंग महाविद्यालय), दुर्ग में दिनांक 3 फरवरी 2026 (मंगलवार) को एक राज्य स्तरीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का विषय “Strengthening Skilled Birth Attendants (SBA): Revival Techniques for High-Risk New-borns” रहा। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य नर्सिंग विद्यार्थियों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को मातृ एवं नवजात शिशु देखभाल के क्षेत्र में नवीनतम ज्ञान एवं व्यावहारिक कौशल से सशक्त बनाना था।
कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्रीमती दुर्गावती कुंजाम, रजिस्ट्रार, छत्तीसगढ़ राज्य नर्सिंग परिषद, रायपुर के करकमलों से हुआ। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीमती शायलू साजी, प्राचार्य, शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय, रायपुर तथा डॉ. श्रीमती रेमा राजेश, प्राचार्य, शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय, दुर्ग उपस्थित रहीं। विशेष अतिथि के रूप में डॉ. श्रीमती अशुलता मिश्रा, प्राचार्य, सी.एम. नर्सिंग इंस्टिट्यूट, भिलाई की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. रोहिणी राउत धुंडे, डॉ. ओंकार खांडवाल एवं डॉ. विनिता धुर्वे ने सहभागिता की। मुख्य वक्ताओं द्वारा उच्च जोखिम नवजात शिशुओं की पहचान, नवजात पुनर्जीवन (NRP), ब्रीच डिलीवरी, तृतीय चरण प्रसव प्रबंधन, प्रसव पश्चात रक्तस्राव प्रबंधन, तथा LaQshya एवं Dakshata दिशानिर्देशों पर आधारित व्यावहारिक एवं कौशल सत्र आयोजित किए गए।
कार्यशाला की संरचना इस प्रकार की गई कि प्रतिभागियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ हैंड्स-ऑन स्किल प्रशिक्षण भी प्राप्त हो सके। प्री-टेस्ट एवं पोस्ट-टेस्ट के माध्यम से प्रतिभागियों के ज्ञान का मूल्यांकन भी किया गया।
इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में संरक्षक श्री महेंद्र चौबे (निदेशक), संयोजक प्रो. आकांक्षा रानी गॉटलिब (प्राचार्य), सह-संयोजक प्रो. इंदु वर्मा (उप-प्राचार्य) का महत्वपूर्ण योगदान रहा। आयोजन अध्यक्ष प्रो. भावना अंगारे, आयोजन सचिव प्रो. सलीक रहमान, तथा कार्यशाला समन्वयक श्री सुधीर तिवारी, श्री आकाश सोमपुरा एवं सुश्री काजल वर्मा के कुशल नेतृत्व एवं समन्वय से यह कार्यक्रम सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न नर्सिंग महाविद्यालयों के 250 से अधिक शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। यह कार्यशाला नर्सिंग शिक्षा तथा मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया।



