
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए अपार आईडी (APAAR ID) बनवाना अब अनिवार्य कर दिया गया है। शिक्षा विभाग के अनुसार, जिन छात्रों की अपार आईडी नहीं बनेगी, उन्हें स्कॉलरशिप, मुफ्त पाठ्यपुस्तक वितरण, यूनिफॉर्म सहित अन्य शैक्षणिक सुविधाओं का लाभ नहीं मिल सकेगा।
शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार अपार आईडी 12 अंकों की एक डिजिटल पहचान संख्या है, जो छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड से जुड़ी होती है। इसके माध्यम से छात्रों की पूरी शैक्षणिक यात्रा का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा। आधार कार्ड और पहचान पत्र के सत्यापन के बाद यू-डायस पोर्टल पर अपार आईडी जनरेट की जा रही है।
60 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा
प्रदेश के 33 जिलों में अपार आईडी बनाने का कार्य तेजी से चल रहा है। अब तक 87.17 प्रतिशत छात्रों की अपार आईडी बन चुकी है। आंकड़ों के अनुसार 8 जिलों में यह प्रगति 67 से 79 प्रतिशत, 12 जिलों में 80 से 89 प्रतिशत और 13 जिलों में 90 से 96 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। वहीं बिलासपुर जिले में यह आंकड़ा लगभग 77 प्रतिशत बताया गया है।
गल्तियों के कारण बढ़ी परेशानी
कई मामलों में जन्मतिथि, नाम या पिता के नाम में त्रुटि के कारण छात्रों की अपार आईडी जनरेट नहीं हो पा रही है। आधार, यू-डायस और स्कूल रजिस्टर के डाटा में मेल न होने से प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन को ऐसे मामलों में तत्काल सुधार कर अपार आईडी बनाने के निर्देश दिए हैं।
ऐसे काम करेगा अपार कार्ड
अपार आईडी बन जाने के बाद छात्रों को किसी भी राज्य या देश में जाने पर मूल दस्तावेज साथ रखने की आवश्यकता नहीं होगी। दुर्घटना, स्थानांतरण या अन्य किसी स्थिति में 12 अंकों की इस यूनिक आईडी से छात्र की पूरी शैक्षणिक जानकारी तुरंत उपलब्ध हो सकेगी, जिससे उन्हें त्वरित सहायता मिल सकेगी।
शिक्षा विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे समय रहते अपने बच्चों की अपार आईडी बनवाएं, ताकि किसी भी शैक्षणिक लाभ से वे वंचित न रहें।
