
गरियाबंद, 18 मार्च 2026।
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में वन विभाग की संवेदनहीनता का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां भालू के हमले में गंभीर रूप से घायल एक ग्रामीण जहां जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहा, वहीं जिम्मेदार अधिकारी उसकी मदद करने के बजाय फोटो खिंचवाने में व्यस्त नजर आए।
जानकारी के अनुसार, घटना परसूली वन परिक्षेत्र के ग्राम कोचई मुड़ा की है। महुआ बीनने जंगल गए 45 वर्षीय पुराणिक राम यादव पर अचानक भालू ने हमला कर दिया। इस हमले में उसके सिर, चेहरे और हाथ पर गंभीर चोटें आईं और वह लहूलुहान होकर मौके पर ही गिर पड़ा। परिजन किसी तरह उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई थी।
अस्पताल में घायल की स्थिति बेहद मार्मिक थी, लेकिन इसके बावजूद उसे उचित देखभाल देने के बजाय कुर्सी पर बैठाए रखा गया। इस दौरान उसकी पत्नी रोती-बिलखती रही, लेकिन मौके पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारी संवेदनशीलता दिखाने के बजाय औपचारिकता निभाते नजर आए।
मदद के नाम पर खानापूर्ति
घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम अस्पताल पहुंची, लेकिन उन्होंने गंभीर रूप से घायल ग्रामीण को प्राथमिक सहायता देने के बजाय केवल एक हजार रुपये की फौरी सहायता राशि देकर फोटो सेशन करना ज्यादा जरूरी समझा। इस व्यवहार को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। उनका आरोप है कि विभाग पीड़ित की वास्तविक मदद के बजाय सिर्फ कागजी कार्रवाई और छवि सुधारने में लगा है।
एंबुलेंस के लिए करना पड़ा इंतजार
डॉक्टरों ने घायल की हालत गंभीर देखते हुए उसे रायपुर रेफर किया, लेकिन यहां भी स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही सामने आई। परिजनों को 108 एंबुलेंस के लिए करीब आधे घंटे तक इंतजार करना पड़ा। इस दौरान घायल दर्द से कराहता रहा और परिवार मदद की गुहार लगाता रहा। बाद में एंबुलेंस पहुंचने पर उसे रायपुर भेजा गया, जहां उसकी हालत अभी भी चिंताजनक बनी हुई है।
सिस्टम पर उठे सवाल
इस घटना ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या सरकारी तंत्र अब केवल औपचारिकता तक सीमित रह गया है? क्या पीड़ितों की मदद सिर्फ फोटो और कागजों तक ही सिमट गई है? अब देखना होगा कि इस मामले में जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह ठंडे बस्ते में चला जाता है।


