छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि पहली शादी कानूनी रूप से समाप्त किए बिना दूसरी शादी करना वैध नहीं है। ऐसे मामले में महिला द्वारा दूसरे पति से गुजारा भत्ता मांगना उचित नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने महिला की क्रिमिनल रिवीजन याचिका खारिज कर दी।

रायपुर 28 फरवरी 2026।छत्तीसगढ़ में वैवाहिक कानूनों को लेकर एक अहम फैसला सामने आया है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि पहली शादी कानूनी रूप से समाप्त नहीं हुई है, तो दूसरी शादी को वैध नहीं माना जा सकता। ऐसी स्थिति में दूसरे पति से गुजारा भत्ता की मांग भी न्यायसंगत नहीं है। कोर्ट ने महिला द्वारा दायर की गई क्रिमिनल रिवीजन याचिका को खारिज कर दिया।
मामला दुर्ग-भिलाई क्षेत्र की रहने वाली एक महिला से जुड़ा है। महिला ने फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन याचिका दायर की थी। इस प्रकरण की सुनवाई हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की एकलपीठ में हुई।
दरअसल, महिला ने अपने दूसरे पति के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता की अर्जी लगाई थी। महिला का दावा था कि 10 जुलाई 2020 को उसकी शादी आर्य समाज मंदिर में संपन्न हुई थी। उसने आरोप लगाया कि शादी के कुछ समय बाद पति ने उसके साथ शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना शुरू कर दी तथा मारपीट कर उसे घर से निकाल दिया। महिला ने यह भी कहा कि उसके पति की मासिक आय लगभग 5 लाख रुपए है, इसलिए उसे हर महीने 1 लाख रुपए गुजारा भत्ता दिया जाए।
हालांकि, सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया। न्यायालय को बताया गया कि महिला की पहले से शादी हो चुकी थी और उसका पहला पति जीवित है। महिला ने अपने पहले पति से विधिवत तलाक लिए बिना ही दूसरी शादी कर ली थी। प्रति-परीक्षण के दौरान महिला ने स्वयं स्वीकार किया कि उसकी पहली शादी से दो बेटे हैं, जो बालिग हैं और उसके साथ रहते हैं।
