छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ ने शनिवार को विद्यालयों का समय पूर्ववत सुबह रखने की मांग की है। संघ का कहना है कि योग, व्यायाम और अन्य गतिविधियों के लिए सुबह का समय सर्वश्रेष्ठ है और देर से शुरू होने वाले स्कूल बच्चों के सर्वांगीण विकास में बाधक हैं।

रायपुर, 29 अगस्त 2025।छत्तीसगढ़ में शनिवार को स्कूल के समय को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के शालेय शिक्षक संघ ने सरकार से आग्रह किया है कि शनिवार को विद्यालय पूर्व की भांति प्रातःकालीन समय पर ही संचालित हों। संघ का कहना है कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बच्चों का सर्वांगीण विकास – शारीरिक, मानसिक, नैतिक और व्यावहारिक शिक्षा के माध्यम से होना आवश्यक है।
संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने कहा कि “व्यायाम से शरीर मजबूत होता है, योग और प्राणायाम से मानसिक संतुलन बनता है और बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी योग और प्राणायाम को शिक्षा का हिस्सा बनाया है। इन गतिविधियों के लिए सुबह का समय ही सर्वश्रेष्ठ माना गया है क्योंकि इन्हें खाली पेट किया जाता है। ऐसे में शनिवार को सुबह स्कूल न लगाना बच्चों के समग्र विकास में बाधा है।”
आदेश पर विवाद
स्कूल शिक्षा विभाग ने वर्ष 2018 में एक आदेश जारी कर सोमवार से शुक्रवार तक स्कूल का समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक और शनिवार को सुबह 7:30 बजे से 11:30 बजे तक निर्धारित किया था। लेकिन हाल ही में 22 जुलाई 2025 को निदेशक, लोक शिक्षण (DPI) ने एक नई समय-सारणी जारी की, जिसके अनुसार शनिवार को भी स्कूल का समय 10 बजे से 4 बजे तक कर दिया गया।
संघ का कहना है कि इस आदेश ने शिक्षा व्यवस्था में भ्रम पैदा कर दिया है और प्रदेश भर के स्कूलों में असमानता की स्थिति हो गई है। साथ ही, योग, प्राणायाम और शारीरिक शिक्षा जैसी गतिविधियाँ लगभग ठप्प हो गई हैं
शिक्षक संघ की अपील
संघ के प्रांतीय महासचिव धर्मेश शर्मा ने कहा कि सरकार को तत्काल इस स्थिति को स्पष्ट करना चाहिए और DPI का आदेश निरस्त कर 2018 की व्यवस्था को पुनः लागू करना चाहिए।वहीं, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी और मीडिया प्रभारी जितेंद्र शर्मा ने कहा कि शनिवार को सुबह स्कूल लगाने का निर्णय हमारे पूर्वज शिक्षाविदों ने गहन विचार के बाद लिया था। इसका मुख्य कारण यह था कि सुबह का समय शारीरिक और मानसिक शिक्षा के लिए सबसे उपयुक्त है। “जब तन स्वस्थ होगा तो मन भी स्वस्थ रहेगा, और यही बच्चों के सर्वांगीण विकास की नींव है।”
सरकार से उम्मीद
संघ ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और शिक्षामंत्री गजेंद्र यादव से मांग की है कि DPI का आदेश रद्द कर शनिवार को सुबह 7:30 से 11:30 या 8 से 12 बजे तक स्कूल संचालन का स्पष्ट निर्देश जारी किया जाए।शिक्षक संघ का कहना है कि जब तक सरकार इस मामले में ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक बच्चों की शिक्षा का संतुलन बिगड़ा रहेगा और योग-प्राणायाम जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियाँ बाधित होती रहेंगी।