
रायपुर। छत्तीसगढ़ में रियल एस्टेट सेक्टर की निगरानी के लिए गठित छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) के सामने बिल्डरों के खिलाफ शिकायतों का अंबार लग गया है। वर्ष 2018 में रेरा लागू होने के बाद से अब तक करीब 3,800 से अधिक शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें से 3,200 से ज्यादा मामलों का निराकरण किया जा चुका है, जबकि 600 से अधिक शिकायतें अभी भी लंबित हैं।
रेरा में हर साल सैकड़ों शिकायतें दर्ज हो रही हैं। प्राधिकरण की अदालत में इन मामलों की सुनवाई कर आदेश जारी किए जाते हैं, लेकिन किसी भी वर्ष सभी मामलों का पूरी तरह निपटारा नहीं हो पाया है। इसके कारण लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
प्रदेश में रियल एस्टेट परियोजनाओं का पंजीयन अनिवार्य
वर्ष 2018 से रेरा कानून लागू होने के बाद प्रदेश में सभी आवासीय और व्यावसायिक रियल एस्टेट परियोजनाओं का पंजीयन अनिवार्य कर दिया गया है। इसके बाद से प्रदेशभर में अधिकांश नई परियोजनाएं रेरा में पंजीकृत हो रही हैं। साथ ही घर खरीदने वाले उपभोक्ताओं की शिकायतें भी बड़ी संख्या में रेरा तक पहुंच रही हैं।
साल-दर-साल शिकायतों की स्थिति
2018 – शिकायतें 225, निराकरण 139, लंबित 89
2019 – नई शिकायतें 697, निराकरण 444, लंबित 342
2020 – नई शिकायतें 352, निराकरण 282, लंबित 412
2021 – नई शिकायतें 392, निराकरण 492, लंबित 312
2022 – नई शिकायतें 298, निराकरण 276, लंबित 334
2023 – नई शिकायतें 375, निराकरण 238, लंबित 471
2024 – नई शिकायतें 719, निराकरण 613, लंबित 577
2025 – नई शिकायतें 733, निराकरण 654, लंबित 656
सुप्रीम कोर्ट ने भी उठाए सवाल
रेरा की कार्यप्रणाली को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी सवाल उठाए हैं। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कई मामलों में रेरा खरीदारों की समस्याओं पर अपेक्षित गंभीरता से सुनवाई करने के बजाय बिल्डरों के पक्ष में अधिक सक्रिय नजर आता है। इस टिप्पणी के बाद रेरा की कार्यप्रणाली को लेकर बहस तेज हो गई है।
इसलिए बढ़ रही शिकायतें
विशेषज्ञों के अनुसार रेरा में शिकायतों के बढ़ने के पीछे कई कारण हैं।
प्रोजेक्ट का तय समय पर पूरा नहीं होना
विज्ञापन या ब्रोशर में वादा की गई सुविधाओं का पूरा न होना
फ्लैट या मकान का कब्जा देने में देरी
निर्माण गुणवत्ता को लेकर विवाद
इन कारणों से घर खरीदारों को वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है और उन्हें न्याय के लिए रेरा का सहारा लेना पड़ता है।

