बिलासपुर |
छत्तीसगढ़ में वर्ष 2018 में हुए राज्यसभा चुनाव को लेकर दायर चुनाव याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है। कांग्रेस प्रत्याशी रहे लेखराम साहू की ओर से प्रस्तुत किए गए सभी नौ गवाहों की गवाही पूरी हो चुकी है। अब आगामी सुनवाई में भाजपा नेत्री एवं पूर्व राज्यसभा सांसद सरोज पांडेय तथा उनके पक्ष के गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में राज्यसभा की एक सीट के लिए हुए चुनाव में भाजपा ने सरोज पांडेय को प्रत्याशी बनाया था, जबकि कांग्रेस ने लेखराम साहू को मैदान में उतारा था। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद लेखराम साहू ने सरोज पांडेय के निर्वाचन को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
शपथ पत्र में जानकारी छिपाने का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरोज पांडेय ने नामांकन और शपथ पत्र में कई महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाईं, जो चुनाव नियमों का उल्लंघन है। चुनाव के समय कांग्रेस प्रत्याशी की ओर से इस संबंध में आपत्तियां भी दर्ज कराई गई थीं, लेकिन तत्कालीन निर्वाचन अधिकारी ने उन्हें खारिज कर दिया था। इसके बाद मामला निर्वाचन आयोग और राज्यपाल तक भी पहुंचा, बावजूद इसके मतदान कराया गया और सरोज पांडेय को विजयी घोषित किया गया।
18 विधायकों के मतदान पर भी विवाद
चुनाव याचिका में यह भी दावा किया गया है कि भाजपा के 18 विधायक लाभ के पद पर थे। इनमें 11 विधायक संसदीय सचिव और 7 विधायक निगम-मंडल के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष पद पर थे। याचिकाकर्ता की मांग थी कि इन विधायकों को मतदान से वंचित किया जाना चाहिए था, लेकिन निर्वाचन अधिकारी ने इस आपत्ति को भी अस्वीकार कर दिया था।
अब बचाव पक्ष की बारी
हालिया सुनवाई के दौरान विधानसभा के तत्कालीन महासचिव चंद्रशेखर गंगराड़े की गवाही दर्ज की गई, जिसके साथ ही याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्य पूरे हो गए। वहीं, सरोज पांडेय की ओर से उनके अधिवक्ता ने शपथ पत्र दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है।
अब अगली सुनवाई में सरोज पांडेय एवं उनके समर्थन में प्रस्तुत किए जाने वाले गवाहों की गवाही दर्ज की जाएगी। मामले की सुनवाई लंबे समय से लंबित है और इसे लेकर राजनीतिक हलकों में लगातार चर्चा बनी हुई है।


