
प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय जे.एस.टी. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बालाघाट (म.प्र.) में विज्ञान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने हेतु “अन्वेषण 4.0” कार्यक्रम का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता (Keynote Speaker) के रूप में स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम आदर्श महाविद्यालय, दुर्ग के सहायक प्राध्यापक डॉ. संदीप कुमार तथा संत गुरु घासीदास शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कुरूद के प्राध्यापक डॉ. हरिराम साहू को आमंत्रित किया गया। महाविद्यालय परिवार द्वारा दोनों अतिथियों का आत्मीय स्वागत कर उन्हें सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. संदीप कुमार ने अपने व्याख्यान में हमारे आसपास पाए जाने वाले पौधों के महत्व, उनकी उपयोगिता तथा औषधीय गुणों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि स्थानीय वनस्पतियाँ पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
वहीं डॉ. हरिराम साहू ने सूक्ष्म जीवों (Microorganisms) की हमारे जीवन में भूमिका को स्पष्ट करते हुए बताया कि ये कृषि, पर्यावरण संरक्षण, खाद्य उत्पादन तथा औषधि निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उनका व्याख्यान विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक रहा।
इस कार्यक्रम में जनभागीदारी अध्यक्ष श्रीमती मौसस हरिनखेडे का विशेष मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार मराठे के कुशल नेतृत्व में कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम के आयोजन में डॉ.सीमा श्रीवास्तव (IQAC समन्वयक), डॉ. राकेश चौरे, डॉ. डॉ. मरकाम, डॉ. पुष्पलता कमलेशिया सहित समस्त प्राध्यापकगण का महत्वपूर्ण योगदान रहा। साथ ही बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की सक्रिय एवं उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विद्यार्थियों द्वारा आयोजित विज्ञान प्रदर्शनी रही, जिसमें कुल 54 वैज्ञानिक मॉडल प्रस्तुत किए गए। इन मॉडलों के माध्यम से विद्यार्थियों ने विज्ञान के विभिन्न सिद्धांतों एवं नवाचारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। इस प्रदर्शनी में बालाघाट जिले के अन्य महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने भी सहभागिता की, जिससे कार्यक्रम का स्तर और अधिक व्यापक एवं प्रभावशाली बना।
अंततः यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ, जिसने उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार एवं अनुसंधान के प्रति रुचि को प्रोत्साहित किया।
