
दुर्ग। शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग के भूगर्भशास्त्र विभाग के स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने राजस्थान के उदयपुर के समीप स्थित खदानों का भौतिक रूप से भ्रमण कर विभिन्न प्रकार के खनिजों एवं चट्टानों के नमूने संग्रहीत किये। इन नमूनों का उपयोग भूगर्भशास्त्र के संग्रहालय एवं प्रायोगिक कक्षाओं के दौरान किया जायेगा। यह जानकारी देते हुए भूगर्भशास्त्र के प्राध्यापक डॉ. प्रशांत श्रीवास्तव ने बताया कि अपने दस दिवसीय जियोलॉजिकल फील्ड वर्क के दौरान विद्यार्थियों ने संगमरमर, फॉस्फोराइट, ग्रेनाईट, सेंडस्टोन, कन्गलोमरेट, स्ट्रेमेटोलिटिक लाइमस्टोन आदि के महत्वपूर्ण नमूने संकलित किये। विद्यार्थियों ने भौतिक रूप से उदयपुर स्थित झामरकोटरा फॉस्फोराइट माइंस तथा बाबरमाल स्थित पिंक मारबल की खदानों का भ्रमण कर वहां की भूवैज्ञानिक परिस्थितियां तथा पर्यावरणीय अध्ययन किया।

भूगर्भशास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ. एस.डी. देशमुख ने बताया कि इन विद्यार्थियों ने राजस्थान में चूना पत्थर से निर्मित गुफाओं में स्थित स्टेलेक्टाइट तथा स्टेलेमाइट का भी अध्ययन किया। विद्यार्थियों ने ग्लालियर स्थित भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) द्वारा निर्मित म्यूजियम का भ्रमण कर पृथ्वी में जीवों के उत्पति से लेकर वर्तमान समय तक के क्रमिक विकास एवं विभिन्न प्रकार के खनिजों, चट्टानों, जीवाश्म तथा रत्नों का अध्ययन किया। जियोलॉजिकल फील्ड वर्क के दौरान उदयपुर स्थित मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के भूगर्भशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित जियो यूथ कान्क्लेव में 8 राज्यों के 15 विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों के मध्य पावर प्वाइंट प्रस्तुतिकरण करते हुए साइंस कालेज, दुर्ग की भूगर्भशास्त्र की छात्रा कु. रूचि देशमुख ने श्रेष्ठ पेपर प्रस्तुतिकरण का पुरस्कार जीता। इसके अलावा 6 विद्यार्थियों ने पेपर प्रस्तुतिकरण तथा पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। भूविज्ञान के विद्यार्थियों की राष्ट्रीय स्तर पर सफलता प्राप्त करने हेतु महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय कुमार सिंह ने बधाई दी। ग्वालियर में भारतीय ज्ञान परंपरा के भूविज्ञान में प्रयोग विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमीनार में भी साइंस कालेज, दुर्ग के कु. रूचि देशमुख, कु फाल्गुनी साहू तथा कु. दीपा साहू ने पावर प्रस्तुतिकरण करते हुए उपस्थित जन समुदाय की प्रशंसा बटोरी।


