भिलाई :ऑपरेशन सिंदूर का मैप ISIS को भेजा:हथियार उठाने को भी तैयार थे, पाकिस्तानी हैंडलर्स ने किया ब्रेनवॉश; दोनों 10वीं-11वीं के स्टूडेंट, पिता CRPF जवान

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दुर्ग। छत्तीसगढ़ ATS ने रायपुर और भिलाई से दो नाबालिग छात्रों (10वीं और 11वीं क्लास) को पकड़ा है। दोनों ISIS के पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में थे और ऑनलाइन कट्टरपंथी नेटवर्क का हिस्सा बन चुके थे। ATS के मुताबिक नाबालिगों को हिंसक कंटेंट, गेमिंग चैट और इंस्टाग्राम ग्रुप के जरिए धीरे-धीरे ब्रेनवॉश किया गया।
नाबालिगों को ऑनलाइन अपनी पहचान छिपाने के लिए TOR, VPN, फर्जी IP और डार्क-वेब इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी जा रही थी। यह सब काम इंस्टाग्राम के सीक्रेट ग्रुप और गेमिंग चैट के जरिए होता था।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान एयर स्ट्राइक मैप भेजे गए
भारत और पाकिस्तान के बीच मीडिया ब्लैकआउट के समय पाकिस्तानी हैंडलर्स ने नाबालिगों से भारतीय टीवी चैनलों पर दिख रहे एयर स्ट्राइक मैप की क्लिपिंग मांगी। दोनों ने मैप रिकॉर्ड करके हैंडलर्स को भेज दिए। ATS का कहना है कि नाबालिग हथियार उठाने तक को तैयार थे।
ATS ने दोनों बच्चों को करीब डेढ़ साल तक चुपचाप मॉनिटर किया। चौकाने वाली बात यह रही कि एक नाबालिग का पिता CRPF जवान है और दूसरे का पिता ऑटो चलाते हैं।


कैसे फंसे नाबालिग?
यह मामला तब खुला जब ATS ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक कंटेंट मॉनिटर किया। जांच में पता चला कि दोनों नाबालिग ISIS के नाम से चल रहे एक फर्जी इंस्टाग्राम ग्रुप में एक्टिव थे।
पाकिस्तानी हैंडलर्स लगातार नए फेक अकाउंट बनाते रहे और जैसे ही किसी ग्रुप पर निगरानी का खतरा लगता, उसे बंद कर देते।

ब्रेनवॉश का तरीका — हिंसा और कट्टरपंथ की लगातार खुराक
दोनों बच्चों को पहले हल्के धार्मिक पोस्ट भेजे गए, फिर धीरे-धीरे हिंसक वीडियो, ब्लास्ट के क्लिप, जिहादी भाषण और आक्रामक कंटेंट दिखाया गया। हैंडलर्स उन्हें “असली मुजाहिद” जैसी बातें बोलकर मानसिक रूप से अपनी तरफ झुकाते थे।


गेमिंग चैट भी बना हथियार
शूटिंग और मिशन-बेस्ड गेम खेलते समय हैंडलर्स निजी चैट रूम में नाबालिगों से बात करते थे। गेम का हिंसक माहौल पहले ही दिमाग को तैयार कर देता है, इसलिए कट्टरपंथ से जुड़ी बातें बच्चों को सामान्य लगने लगती थीं।
ATS ने जब चैट, फर्जी IDs, वीडियो और मैसेज परिवार को दिखाए, तो वे हैरान रह गए। पूछताछ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत की जा रही है और दोनों बच्चों को साइकोलॉजिकल काउंसलिंग भी दी जा रही है।
ATS अब उन अन्य सोशल मीडिया IDs और IP लॉग्स की जांच कर रही है, जो इसी नेटवर्क से जुड़े थे। केस UAPA के तहत दर्ज है और जांच जारी है।

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