‘सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में, यह किसी को पता नहीं होता’, ये टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान बुधवार को की. कहा कि, किसी को कुत्तों को भी यह सलाह देनी चाहिए कि वे लोगों को न काटें. अदालत ने कहा कि, कोई भी जानवर का मन नहीं पढ़ सकता कि कुत्ता काटने के मूड में है या नहीं.
यह मामला जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन वी अंजारिया की बेंच के सामने आया. जस्टिस नाथ ने कहा कि कुत्ते किसी को तब काट सकते हैं या उसका पीछा कर सकते हैं जब वह व्यक्ति टू-व्हीलर या साइकिल पर हो, और वह व्यक्ति गिर सकता है या एक्सीडेंट हो सकता है.
जस्टिस नाथ ने सीनियर वकील कपिल सिब्बल से पूछा, “जबकि वे सड़क पर दौड़ते हैं, यह अपने आप में गुजरने वाली गाड़ियों, खासकर टू-व्हीलर और साइकिल सवारों के लिए खतरनाक है. क्या आप टू-व्हीलर पर रहे हैं या नहीं”, सिब्बल ने जवाब दिया कि वह अपने करियर के शुरुआती दिनों में रहे थे.
जस्टिस नाथ ने कहा कि काटना ही अकेला मुद्दा नहीं है. कुत्ते साइकिल पर लोगों का पीछा करते हैं. इस पर सिब्बल, जो इस मामले में एक पार्टी की तरफ से पेश हुए थे, ने कहा कि हर कुत्ता ऐसा नहीं करता और इसकी पहचान करना जरूरी है.
सिब्बल ने कुत्तों के काटने और बेकाबू कुत्तों के रिहैबिलिटेशन से निपटने के लिए सुझाव दिए. जस्टिस मेहता ने कहा, “बस एक चीज जो छूट गई है, वह है कुत्ते को काउंसलिंग देना कि एक बार वापस छोड़े जाने के बाद कुत्ता काटे नहीं…” सिब्बल ने कहा कि यह शायद हल्के-फुल्के अंदाज में कहा गया होगा और मुझे यकीन है कि आपका मतलब यह नहीं है.
पिछले साल 7 नवंबर को, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन, हॉस्पिटल, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे इंस्टीट्यूशनल एरिया में कुत्तों के काटने की घटनाओं में खतरनाक बढ़ोतरी को देखते हुए, पब्लिक सेफ्टी, हेल्थ और आवारा कुत्तों के मैनेजमेंट के हित में निर्देश जारी करना जरूरी है. कोर्ट ने निर्देश दिया कि ऐसे कुत्तों को तय शेल्टर में ले जाया जाना चाहिए.
याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने सड़कों पर इतने सारे कुत्तों के लिए नगर निगम अधिकारियों को ज़िम्मेदार ठहराया. एक याचिकार्ता ने कहा कि नियमों का पालन होगा. तभी कुत्तों के काटने की घटनाएं नियत्रित होंगी. यह मामला जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन वी अंजारिया की बेंच कर रही है.
सुप्रीम कोर्ट एक स्वतः संज्ञान केस की सुनवाई कर रहा था, जो 28 जुलाई को दिल्ली में, खासकर बच्चों में आवारा कुत्तों के काटने से रेबीज होने की एक मीडिया रिपोर्ट पर शुरू किया गया था.
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामले का दायरा दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं से बाहर बढ़ा दिया था और निर्देश दिया था कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस मामले में पार्टी बनाया जाए.
सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में, यह किसी को पता नहीं होता’, आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी


