जग्गी हत्याकांड में नया मोड़: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केस री-ओपन, 1 अप्रैल को अंतिम सुनवाई

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बिलासपुर, 25 मार्च 2026।
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में एक बार फिर बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। Supreme Court of India के निर्देश पर इस मामले को दोबारा खोल दिया गया है। अब इस केस में 1 अप्रैल को अंतिम सुनवाई (फाइनल हियरिंग) निर्धारित की गई है।

सुनवाई के दौरान अमित जोगी, राज्य सरकार, सतीश जग्गी और Central Bureau of Investigation (CBI) को अपना पक्ष रखने की अनुमति दी गई है।

मामला क्या है

4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज मामले में तत्कालीन राजनीतिक परिदृश्य के चलते कई बड़े नाम सामने आए थे, जिनमें Amit Jogi का नाम भी शामिल था। मामले में कुल 31 आरोपियों को नामजद किया गया था, जिनमें से दो आरोपी सरकारी गवाह बन गए थे।

निचली अदालत का फैसला

वर्ष 2007 में निचली अदालत ने 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जबकि अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए मृतक के पुत्र सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी, जिस पर अब सुनवाई दोबारा शुरू हुई है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

रामअवतार जग्गी, पूर्व केंद्रीय मंत्री Vidyacharan Shukla के करीबी माने जाते थे। उस समय छत्तीसगढ़ की राजनीति में कांग्रेस और एनसीपी के बीच वर्चस्व की लड़ाई तेज थी। बताया जाता है कि विधानसभा चुनाव से पहले एनसीपी की बढ़ती सक्रियता ने राजनीतिक माहौल को और संवेदनशील बना दिया था।

आगे क्या

अब सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 1 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट इस बहुचर्चित हत्याकांड में अहम फैसला सुना सकता है, जिस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।

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