| बिलासपुर.
बिलासपुर हाई कोर्ट ने हत्या के प्रयास के एक नाबालिग आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस संजय कुमार जायसवाल की सिंगल बेंच ने स्पष्ट कहा कि नाबालिग का परिवार आपराधिक गतिविधियों, विशेष रूप से अवैध शराब के कारोबार में संलिप्त है। ऐसे में उसकी रिहाई से उसके दोबारा अपराधियों के संपर्क में आने की पूरी आशंका है।
शराब विवाद में चाकूबाजी की घटना
मामला पचपेड़ी थाना क्षेत्र का है। 26 नवंबर 2025 की रात करीब 8 बजे शराब को लेकर हुए विवाद में आरोपी कमल कुमार महिलंगे, राकेश और जयेश के साथ नाबालिग ने मिलकर पीड़ित और उसके दोस्तों पर हमला कर दिया।
आरोप है कि जब पीड़ित को बचाने उसके दोस्त राजेंद्र और फूलचंद पहुंचे, तो नाबालिग ने राजेंद्र के पेट में चाकू घोंप दिया और फूलचंद के सीने पर भी वार किया। घटना के बाद पुलिस ने बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर 27 नवंबर को नाबालिग को गिरफ्तार कर बाल संरक्षण गृह भेज दिया था।
निचली अदालत से राहत नहीं, हाई कोर्ट में भी याचिका खारिज
निचली अदालत और किशोर न्याय बोर्ड से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद नाबालिग ने हाई कोर्ट में रिवीजन याचिका दायर की थी।
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि घटना में प्रयुक्त चाकू नाबालिग से बरामद किया गया है। साथ ही यह तथ्य भी सामने आया कि नाबालिग के पिता कमल कुमार के खिलाफ अवैध शराब से जुड़े मामले पहले से दर्ज हैं। आरोप है कि पिता अपने पांचों बेटों के साथ मिलकर अवैध कारोबार संचालित करता है और अपराधों में बच्चों का इस्तेमाल करता है।
धारा 12 जेजे एक्ट का हवाला
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 12 के तहत जमानत सामान्य नियम है, लेकिन यदि बच्चे की रिहाई उसे अपराधियों के संपर्क में लाती है या न्याय के उद्देश्यों को विफल करती है, तो जमानत रोकी जा सकती है।
प्रोबेशन ऑफिसर की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कोर्ट ने कहा कि नाबालिग को उचित मार्गदर्शन का अभाव है और वह असामाजिक तत्वों के संपर्क में है। ऐसी स्थिति में उसे संरक्षण गृह में रखना उसके व्यवहार सुधार और भविष्य के हित में अधिक उपयुक्त होगा।
अदालत ने निचली अदालत और किशोर न्याय बोर्ड के आदेश को बरकरार रखते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।

