बिलासपुर,
छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात सुरक्षाबलों के लिए एक महत्वपूर्ण और राहतभरा निर्णय सामने आया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक गंभीर रूप से घायल CAF (छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स) जवान की नक्सल प्रभावित बीजापुर में की गई पोस्टिंग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। साथ ही न्यायालय ने संबंधित विभाग को निर्देश दिया है कि जवान को उसकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुरूप किसी सुरक्षित मैदानी क्षेत्र में पदस्थ किया जाए।
यह मामला CAF जवान दिनेश ओगरे से जुड़ा है, जो पूर्व में नक्सली हमले में गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने विभागीय कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए इसे संवेदनहीन रवैया करार दिया।
नक्सली हमले में गंभीर रूप से घायल हुआ था जवान
जानकारी के अनुसार, जवान की तैनाती पूर्व में पामेड़ क्षेत्र में थी, जो नक्सली गतिविधियों के लिए अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। इसी दौरान हुए एक हमले में उनके सिर में गोली लगने से वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। लंबे उपचार के बाद वे ड्यूटी पर लौटे, लेकिन उनकी शारीरिक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी।
विभाग ने पुनः नक्सल क्षेत्र में कर दी पोस्टिंग
स्वास्थ्य को देखते हुए सुरक्षित स्थान पर पदस्थापना की अपेक्षा थी, लेकिन विभाग ने उन्हें पुनः बीजापुर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भेज दिया। जवान द्वारा आपत्ति दर्ज कराने के बावजूद विभाग ने कोई राहत नहीं दी।
हाईकोर्ट की शरण में पहुंचा मामला
विभागीय स्तर पर समाधान नहीं मिलने पर जवान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में उन्होंने स्वास्थ्य स्थिति का हवाला देते हुए सुरक्षित क्षेत्र में तैनाती की मांग की।
कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि किसी गंभीर रूप से घायल सुरक्षाकर्मी की स्वास्थ्य स्थिति की अनदेखी करना न केवल अमानवीय है, बल्कि प्रशासनिक दृष्टि से भी अनुचित है।
स्पष्ट निर्देश जारी
सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने बीजापुर पोस्टिंग पर रोक लगाते हुए आदेश दिया कि जवान को तत्काल प्रभाव से मैदानी क्षेत्र में पदस्थ किया जाए।
न्यायालय का यह फैसला न केवल संबंधित जवान के लिए राहतभरा है, बल्कि भविष्य में अन्य सुरक्षाकर्मियों के मामलों में भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

