
📍 रायपुर | 16 फरवरी 2026
राजधानी रायपुर में शहरी प्रशासन से जुड़ा एक अहम निर्णय सामने आया है। रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) और छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड की नौ आवासीय कॉलोनियों को रायपुर नगर निगम को सौंपने का फैसला लिया जा चुका है। हालांकि, अंतिम क्रियान्वयन शासन स्तर से विस्तृत नियमावली जारी होने के बाद ही संभव होगा।
नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक, जैसे ही शासन की स्पष्ट गाइडलाइन प्राप्त होगी, तीनों एजेंसियों की संयुक्त टीम कॉलोनियों का सर्वे शुरू करेगी। इस सर्वे का उद्देश्य बुनियादी ढांचे की वास्तविक स्थिति का तकनीकी मूल्यांकन करना है।
🔎 संयुक्त सर्वे में इन बिंदुओं पर रहेगा फोकस
संयुक्त सर्वे के दौरान निम्न प्रमुख सुविधाओं की विस्तृत जांच की जाएगी—
पेयजल आपूर्ति तंत्र
सीवरेज एवं ड्रेनेज नेटवर्क
आंतरिक सड़कें
स्ट्रीट लाइट व्यवस्था
उद्यान एवं सार्वजनिक स्थल
सफाई और कचरा प्रबंधन प्रणाली
प्रारंभिक संकेतों के अनुसार, कई कॉलोनियों में 15 से 20 वर्ष पुरानी पेयजल पाइपलाइनें बड़ी चुनौती बन सकती हैं। इनकी उपयोग अवधि लगभग समाप्ति पर है, जिससे बार-बार लीकेज और मरम्मत की समस्याएं सामने आती रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हैंडओवर से पहले व्यापक सुधार और उन्नयन जरूरी होगा।
🌧️ ड्रेनेज और सीवरेज की स्थिति चिंताजनक
कई क्षेत्रों में नालियां जर्जर या क्षतिग्रस्त बताई जा रही हैं। बरसात के मौसम में जलभराव का खतरा बढ़ सकता है। सर्वे के बाद मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक बजट का अनुमान तैयार किया जाएगा।
🚧 सड़क और प्रकाश व्यवस्था भी मुद्दा
कई स्थानों पर आंतरिक सड़कों की ऊपरी परत उखड़ चुकी है। स्ट्रीट लाइट नेटवर्क आंशिक रूप से बंद होने से सुरक्षा और यातायात दोनों प्रभावित हो रहे हैं। तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर चरणबद्ध सुधार कार्यों की योजना बनाई जाएगी।
💰 वित्तीय दबाव और संसाधन प्रबंधन
हैंडओवर के बाद सफाई, उद्यान रखरखाव, जलापूर्ति, प्रकाश व्यवस्था और अन्य नागरिक सुविधाओं की जिम्मेदारी नगर निगम पर होगी। इसके लिए अतिरिक्त सफाई कर्मियों, पंप ऑपरेटर, इलेक्ट्रिशियन और सुरक्षा गार्ड की नियुक्ति करनी पड़ सकती है।
हालांकि संपत्ति कर और उपयोग शुल्क से आय बढ़ने की संभावना है, लेकिन शुरुआती चरण में खर्च अधिक रहने का अनुमान है। प्रशासन आय-व्यय संतुलन के लिए रणनीति तैयार कर रहा है।
🌳 उद्यानों की हालत भी सुधार मांगती
कुछ बड़ी टाउनशिप में पार्कों की स्थिति संतोषजनक नहीं है। घास सूख चुकी है, सिंचाई व्यवस्था कमजोर है और बच्चों के खेल उपकरण जंग खा रहे हैं। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर पुनरुद्धार और सौंदर्यीकरण की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
⏳ गाइडलाइन के बाद ही अंतिम कदम
नगर निगम प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि शासन की विस्तृत नियमावली जारी होने के बाद ही हैंडओवर की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू होगी। संयुक्त सर्वे और तकनीकी मूल्यांकन के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
शहरी विकास के लिहाज से यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन बुनियादी ढांचे की स्थिति और वित्तीय बोझ इसे चुनौतीपूर्ण भी बना सकता है।

